MP News: एक शिक्षक जो वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहा है. जिसने अपनी पूरी जिंदगी शिक्षा को समर्पित कर दी. जिसने गांव-गांव ज्ञान की रोशनी पहुंचाई. क्या आज वही शिक्षक अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहा है? मऊगंज से उठी शिक्षकों की पीड़ा अब सरकार के दरवाजे तक पहुंच गई है. मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा की जाए और उन पर TET की अनिवार्यता न थोपी जाए.
मऊगंज में शिक्षक संघ ने बड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों की भर्ती उस समय लागू नियमों और पात्रता मानकों के अनुसार हुई थी. ऐसे में बाद में लागू हुए TET नियम को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता. संघ का कहना है कि हाल के न्यायिक घटनाक्रमों के बाद हजारों शिक्षक असमंजस में हैं. जिन शिक्षकों ने वर्षों तक बच्चों का भविष्य संवारा, आज वही अपने भविष्य को लेकर चिंता में हैं. किसी ने तीस साल सेवा दी. किसी ने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षित किया, तो किसी ने दूर-दराज के गांवों में शिक्षा की अलख जगाई और आज सवाल यह है कि क्या उनके अनुभव और समर्पण से बड़ा कोई प्रमाण पत्र हो सकता है?
TET से छूट की उठाई मांग
शिक्षक संघ ने मांग की है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से पूर्ण छूट दी जाए, उनकी वरिष्ठता, पदोन्नति और सेवा लाभ सुरक्षित रखे जाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेष कानून बनाकर उन्हें राहत प्रदान की जाए.
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चिंता में लाखों शिक्षक
शिक्षक सिर्फ कर्मचारी नहीं होता. वह समाज का निर्माता होता है. वह आने वाली पीढ़ियों की नींव तैयार करता है. आज मऊगंज से उठी यह आवाज केवल कुछ शिक्षकों की मांग नहीं, बल्कि उन लाखों शिक्षकों की चिंता है. जिन्होंने अपना पूरा जीवन बच्चों के भविष्य के नाम कर दिया. अब निगाहें केंद्र और राज्य सरकार पर हैं. क्या दशकों की सेवा को सम्मान मिलेगा? क्या अनुभव की कीमत समझी जाएगी? या फिर लाखों शिक्षकों की चिंता और बढ़ेगी?
