Mauganj News: मऊगंज जिले में दो छात्रों की नदी में डूबने से हुई मौत के मामले में न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे परिजनों का इंतजार गुरुवार को आखिरकार आक्रोश में बदल गया. परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि वे करीब आधे घंटे तक एसपी कार्यालय के नीचे खड़े होकर पुलिस अधीक्षक से मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी. लंबे इंतजार के बाद गुस्साए परिजन सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रीवा-मिर्जापुर हाईवे पर चक्काजाम कर दिया. देखते ही देखते मौके पर नारेबाजी, हंगामा और तनाव की स्थिति बन गई.
महादेवन में दो छात्रों की मौत ने खड़े किए कई सवाल
दरअसल पूरा मामला 8 अगस्त का है. लौर थाना क्षेत्र के महादेवन में पिकनिक मनाने गए करीब आधा दर्जन छात्रों में से 17 वर्षीय आशीष जायसवाल और 19 वर्षीय आयुष द्विवेदी की नदी में डूबने से मौत हो गई थी. घटना के बाद से ही दोनों परिवारों में मातम पसरा है लेकिन अब परिजन घटना को लेकर कई गंभीर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि जिस तरह यह घटना हुई और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई सामने आई, उससे उन्हें पूरी घटना संदिग्ध लग रही है.
कई घंटे बाद पुलिस पहुंचने का आरोप
मृतकों के परिजनों का आरोप है कि घटना की सूचना पुलिस को दिए जाने के बावजूद पुलिस करीब कई घंटे बाद पहुंची. तब तक स्थानीय ग्रामीण नदी में उतरकर दोनों छात्रों के शव बाहर निकाल चुके थे.
ये भी पढ़ें: Mauganj News: खटखरी पंचायत में 2 करोड़ का घोटाला, सरपंच,सचिव और दलाल पर आरोप, ग्रामीणों ने की ये मांग
परिजनों ने उठाई हत्या के एंगल से जांच की मांग
परिजनों का कहना है कि अब मामला उन्हें सिर्फ हादसा नहीं लग रहा है. उनका दावा है कि छात्रों के साथ गए कुछ अन्य युवकों से मृतकों का पहले विवाद चल रहा था. परिजनों ने दोनों छात्रों के शरीर पर चोट के निशान होने का भी दावा किया है. इन्हीं बातों के आधार पर परिवार घटना की गहराई से जांच कराने और हत्या की आशंका के एंगल को भी जांच में शामिल करने की मांग कर रहा है. हालांकि हत्या या साजिश के आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति पुलिस की निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी.
इंतजार ने बढ़ाया आक्रोश
13 अगस्त को परिजन अपनी मांगों को लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे थे. उनका उद्देश्य एसपी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करना था. परिजनों के मुताबिक वे काफी देर तक कार्यालय के नीचे खड़े रहे और एसपी से मुलाकात का इंतजार करते रहे. करीब आधे घंटे तक इंतजार के बाद भी जब मुलाकात नहीं हुई तो परिवार और ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया. इसके बाद उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
वाहनों की लगी कतार
आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने रीवा-मिर्जापुर हाईवे पर पहुंचकर चक्काजाम कर दिया. हाईवे पर प्रदर्शन शुरू होते ही दोनों तरफ वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई और सड़क पर वाहनों की कतार लगने लगी. मौके पर मौजूद लोगों में आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दो युवाओं की मौत के मामले को गंभीरता से लिया जाए और प्रत्येक बिंदु की निष्पक्ष जांच कर परिवार को सच्चाई बताई जाए.
बातचीत के बाद खुला हाईवे
चक्काजाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया. करीब एक घंटे तक हाईवे पर जाम की स्थिति बनी रही. इसके बाद पुलिस अधीक्षक अपने चैंबर से बाहर आए और मृतकों के परिजनों से बातचीत की. एसपी द्वारा परिजनों की बात सुने जाने और उनकी मांगों पर चर्चा के बाद प्रदर्शनकारियों ने हाईवे से हटना स्वीकार किया. इसके बाद सड़क पर यातायात धीरे-धीरे बहाल हुआ और जाम समाप्त हो गया.
ये भी पढ़ें: रीवा-मऊगंज के 8 सरकारी अस्पतालों का संचालन होगा आउटसोर्स, पायलट प्रोजेक्ट से क्या-क्या बदलेगा?
अब जांच पर टिकी परिवार की उम्मीद
दो छात्रों की मौत का यह मामला अब सिर्फ एक हादसे की जांच तक सीमित नहीं रह गया है. परिजन पुलिस से कई सवालों के जवाब मांग रहे हैं. पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने में इतना समय क्यों लगा, मृतकों के शरीर पर बताए जा रहे चोट के निशानों की वजह क्या है और उनके साथ गए छात्रों के बीच विवाद की वास्तविकता क्या थी? इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा.
फिलहाल पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार के संदेह को दूर करते हुए घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करना है. क्योंकि दो परिवारों ने अपने बेटों को खोया है और अब उनकी सबसे बड़ी मांग यही है कि मौत का सच सामने आए. हादसा था तो हादसे की पूरी सच्चाई और यदि कोई साजिश थी तो उसके पीछे छिपे चेहरों का खुलासा हो.
