‘मैं जिंदा हूं साहब…’, सतना में जमीन हड़पने के लिए भतीजे ने चाचा को बताया मृत, जांच के आदेश

Satna Land Grab Fake Death Case: ईश्वरदीन सोनी रेलवे से सेवानिवृत्त हैं. जो रिटायर होने के बाद सतना में ही रहने लगे. लेकिन उनके भतीजे ने सरकारी तंत्र से मिलीभगत कर मृत घोषित कर दिया, जबकि उनके 3 बेटे हैं.
Satna Land Grab Fake Death Case

सतना में चाचा को मृत बताकर भतीजे ने हड़पी जमीन

Nephew Declares Uncle Dead: सतना जिले में संपत्ति हड़पने के लिए भतीजे ने चाचा को ही मृत घोषित कर दिया. हद तो तब हुई, जब सरकारी दस्तावेजों के साथ ही स्थानीय पार्षद ने भी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया. जब यह मामला सामने आया तो हर कोई हैरान रह गया. क्योंकि ईश्वरदीन जिनको रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, वो असल में जीवित हैं और उनके तीन बेटे हैं. इसके बावजूद भी भतीजे ने सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों की जमीन को हड़प लिया. जानें क्या है पूरा मामला?

ईश्वरदीन सोनी रेलवे से सेवानिवृत्त हैं. जो रिटायर होने के बाद सतना में ही रहने लगे. लेकिन उनके भतीजे ने सरकारी तंत्र से मिलीभगत कर मृत घोषित कर दिया, जबकि उनके 3 बेटे हैं. ईश्वरदीन सोनी की सतना के कोठी में जमीन है. उनके अनुसार, इस जमीन को हड़पने के लिए भतीजा रामकरण सोनी ने साल 2024 में पहले नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया, जिसमें लंबी बीमारी से निधन की बात कही.

साल 2015 में मौत बताकर बनवाया रिकॉर्ड

नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र बनने से पहले सत्यापन के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए और प्रमाण पत्र के आधार पर तहसीलदार सतना ने मृत्यु पंजीयन आदेश जारी कर दिया. इतना ही नहीं वार्ड पार्षद ने भी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया. जिसके अनुसार, ईश्वरदीन सोनी की मृत्यु 18 जुलाई 2015 को हुई थी. भतीजे ने इतनी सफाई के साथ चाचा के साथ ठगी की है कि किसी को भी शक ना हो. इसके लिए कई गवाहों के भी प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर हैं.

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कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

असली खेल तो तब हुआ जब भतीजे रामकरण ने जमीन हड़पने के लिए स्थानीय पटवारी को भी शामिल कर लिया. पटवारी प्रवीण सिंह ने रिपोर्ट तैयार कर ईश्वरदीन को मृतक बताया और भतीजे के वारिस के तौर पर दिखाया. जिसके बाद जमीन भतीजे के नाम पर हो गई. बाद में वही जमीन पटवारी ने अपनी पत्नी के नाम पर खरीद ली. जबकि सच्चाई यह है कि जमीन के असली मालिक आज भी जिंदा हैं. लेकिन जैसे ही यह मामला कलेक्टर के पास पहुंचा तो उन्होंने अधिकारियों की क्लास लगा दी और जांच के आदेश दिए. फिलहाल, अब इस मामले में जांच शुरू हो गई है.

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