मऊगंज में फाइलों का गुमनामी सिस्टम या कार्रवाई पर पर्दा? कलेक्टर के आदेश के बाद भी सरपंच और सचिव पर कार्रवाई नहीं
रीवा जिला पंचायत(File Photo)
MP News: मऊगंज जिले की जनपद पंचायत हनुमना अंतर्गत ग्राम पंचायत बरांव में कथित अनियमितताओं की जांच में तत्कालीन सरपंच और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने के बावजूद मामला अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. आरोप है कि कलेक्टर मऊगंज द्वारा अनुमोदित जांच रिपोर्ट और मूल नस्ती जिला पंचायत रीवा भेजे जाने के महीनों बाद भी संबंधित अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
16 मार्च को जारी किया था कार्रवाई का आदेश
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार कलेक्टर कार्यालय मऊगंज से 16 मार्च 2026 को जिला पंचायत रीवा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र क्रमांक 291/शिका/2026 जारी किया गया था. पत्र में जनपद पंचायत हनुमना की संयुक्त जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए तत्कालीन सचिव रामधनी मिश्रा और तत्कालीन सरपंच अनीता साकेत के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक, निलंबन एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे.
पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि संयुक्त जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन सचिव के विरुद्ध मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 के तहत अनुशासनात्मक एवं निलंबन की कार्रवाई तथा तत्कालीन सरपंच के विरुद्ध पृथक रूप से पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के तहत कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. कलेक्टर द्वारा अनुमोदित यह पत्र मूल जांच रिपोर्ट एवं मूल नस्ती के साथ जिला पंचायत रीवा को प्रेषित किया गया था.
कार्रवाई के इंतजार में फाइलें धूल फांक रही!
सूत्रों की मानें तो उक्त फाइल जिला पंचायत कार्यालय पहुंचने के बाद कार्रवाई की प्रतीक्षा में धूल फांक रही है. आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि मऊगंज जिले से जिला पंचायत रीवा भेजी जाने वाली कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबे समय तक लंबित रखी जाती हैं, जिससे जांच और दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
जिला पंचायत ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच में दोष पाए जाने और कलेक्टर की कार्रवाई की अनुशंसा के बाद भी रीवा जिला पंचायत ने एक्शन क्यों नहीं लिया. आखिर जिला पंचायत रीवा द्वारा अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? यदि कार्रवाई नहीं हुई है तो इसके पीछे प्रशासनिक कारण क्या हैं? और यदि प्रक्रिया जारी है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
इस मामले ने पंचायत प्रशासन की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की नजर अब जिला पंचायत रीवा पर टिकी हुई है कि आखिर दोषियों के विरुद्ध कब तक कार्रवाई होती है या फिर यह फाइल भी सरकारी दफ्तरों की अलमारियों में दबकर रह जाएगी.
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