भक्ति और विश्वास की ताकत का अद्भुत चमत्कार, 44 डिग्री के ऊपर तामपान फिर भी अग्नि तपस्या में लीन 2 साध्वी
भीषण गर्मी में साध्वियों की तपस्या जारी
हमारे सनातन धर्म में तपस्या का बड़ा महत्व बताया गया है. तपस्या के बल पर हमारे ऋषि मुनियों ने साक्षात भगवान के दर्शन किए और उनसे मनचाहा वरदान भी प्राप्त किया. आज इस आधुनिक युग में भी कठिन तप करने वाले साधु मौजूद हैं जो अपनी साधना से लोगों का ध्यान आकर्षण कर लेते हैं. संस्कारधानी जबलपुर के तिलवारा घाट में इन दिनों कुछ ऐसा ही कठिन तक नजर आ रहा है नौतपा चल रहे हैं तापमान 44 डिग्री के ऊपर पहुंच चुका है लेकिन नर्मदा तट तिलवारा घाट में दो साध्वी अग्नि तपस्या में लीन हैं.
घाट पर आने वाला जो भी शख्स इन्हें देखता है ठहर जाता है और हैरानी भी पड़ जाता है कि आखिरकार इतनी कड़ी धूप में ऐसी कठिन तपस्या कैसे संभव है जूना अखाड़ा की किन्नर महामंडलेश्वर साक्षी नंदगिरी और उनकी शिष्या साध्वी पूजा गंगा दशहरा के दिन से इस कठिन अग्नि तपस्या में लगी हुई है तिलवारा घाट काली मंदिर के पास गोबर के कांडों की आग जलाकर घोर तप कर रही है.

महामंडलेश्वर साक्षी नंदगिरी का कहना है कि
महामंडलेश्वर साक्षी नंदगिरी का कहना है कि एक कठिन तपस्या वह सनातन धर्म और गौ रक्षा के लिए कर रही हैं. क्योंकि साधना और तपस्या से सब कुछ हासिल किया जा सकता है इसलिए वह और उनकी शिष्या इस कठिन साधना में लगी हुई है यह अग्नि तपस्या पांच दिनों तक चलेगी इस दौरान वह दोपहर 12 से लेकर 3 बजे तक इसी तरह आग की लपटों के बीचों बीच बैठकर ध्यान करेगी.
44 डिग्री के तापमान पर अग्नि तपस्या जारी
जब आसमान से आग बरस रही है और तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच गया है इन हालातो में आम आदमी का घर से निकलना भी मुश्किल है इस तपती दोपहरी में चारों तरफ आग जलाकर दो साध्वी तपस्या में ली है यह देखकर लोग भी हैरत में पड़ जाते हैं साधु संतों की कठिन तपस्या तो सनातन धर्म में सदियों से चली आ रही है लेकिन कठिन तपस्या आज भी लोग कर रहे हैं यह हैरानी वाली बात है लेकिन फिर भी जबलपुर संस्कारधानी में दो साध्वियों की यह तपस्या अब चर्चा का विषय बन गई है लोगों ने देखने के लिए तपती दुपहरी में नर्मदा घाट आ रहे हैं.
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