मध्य प्रदेश के टीमकमगढ़ जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. जरा सोचिए कि आप अपने बच्चों को स्कूल इस उम्मीद पर भेजते हैं कि वहां टीचर होंगे जो उन्हें पढ़ाएंगे, अच्छे संस्कार देंगे और उनके भविष्य की नींव मजबूत करेंगे. लेकिन अगर बच्चे रोज स्कूल जा रहे हो और टीचर ही पिछले 90 दिनों से गायब हो. ऐसी स्थिति में शिक्षा व्यवस्था और जिला प्रशासन पर सवाल उठना तो लाजमी है.
मनगुवा गांव के प्राथमिक विद्यालय का मामला
दरअसल टीकमगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित मनगुवा गांव के प्राथमिक विद्यालय में अक्सर ताला लटका हुआ पाया जाता है. ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पदस्थ शिक्षक पिछले करीब तीन महीने से स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं, इतना ही नहीं ग्रामीणों का कहना है कि यहां पर पदस्थ शिक्षक को आखिरी बार 15 अगस्त को देखा गया था, जब वह स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने स्कूल पहुंचे थे.
स्कूल के बाहर से लौट आते हैं छात्र
अब जरा सोचिए… जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उन्हें स्कूल पहुंचकर वापस घर लौटना पड़े, तो उनके भविष्य का क्या होगा? जानकारी के मुताबिक इस स्कूल में 50 से अधिक छात्र-छात्राएं हैं. ये बच्चे रोज पढ़ने के लिए घर से तैयार होकर स्कूल जाते हैं और वहां पर पहुंचते हैं तो स्कूल में ताला लटका होने के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटता पड़ता है.
आखिर किसकी जिम्मेदारी और किसकी लापरवाही
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी किसकी है? क्या शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस स्कूल का निरीक्षण नहीं किया? अगर शिक्षक लंबे समय से स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं, तो उनकी उपस्थिति की निगरानी कौन कर रहा है? और अगर ग्रामीणों के आरोप सही हैं, तो अब तक इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मामले को लेकर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विशाल धाकड़ से भी बात की गई। उन्होंने मामले की जानकारी लेकर संबंधित विभाग को सूचित करने की बात कही है. फिलहाल, ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और विद्यालय में नियमित पढ़ाई शुरू कराने की मांग की है.
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