Satna News: मध्य प्रदेश के सतना जिले के उचवा टोला में ऐसी तस्वीर सामने आई है जहां, शासकीय प्राथमिक शाला किसी सरकारी भवन में नहीं, बल्कि एक गरीब ग्रामीण रामसज्जन मल्लाह के निजी घर में पिछले 14 सालों से चल रही है. हैरानी की बात यह है कि रामसज्जन के पास रहने के लिए मात्र दो कमरे हैं. इनमें से एक कमरे में उनका पूरा परिवार गुजर-बसर करता है और दूसरा कमरा उन्होंने बिना एक रुपया किराया लिए गांव के बच्चों की पढ़ाई के लिए दान दे रखा है, जहां स्कूल का संचालन होता है.
कहां का है मामला?
दरअसल, पूरा मामला सतना जिले के उचवा टोला का है. जहां उचवा टोला निवासी रामसज्जन मल्लाह के घर मे ही शासकीय प्राथमिक शाला स्कूल का संचालन होता है. रामसज्जन मल्लाह के घर मे मात्र दो छोटे से कमरे हैं. एक कमरे में उनका पूरा परिवार जीवन यापन करता है और दूसरे कमरे में स्कूल संचालन होता है. जब स्कुल की छुट्टी होती है तब उसी कमरे का रामसज्जन मल्लाह इस्तेमाल भी करते हैं. रामसज्जन मल्लाह के परिवार की बात करे तो इनके परिवार में उनकी पत्नी और तीन बेटे हैं.
शासकीय प्राथमिक शाला स्कूल उचवा टोला में 23 छात्र हैं और दो महिला टीचर हैं. महिला टीचर में शैलजा गौतम और प्रभारी प्रधानाध्यापक अनीता सिंह हैं.
घर में स्कूल क्यों संचालन हो रहा है?
रामसज्जन मल्लाह ने बताया कि जब वे छोटे थे, तो उन्हें पढ़ने के लिए यहां से 3 किलोमीटर दूर तिघरा प्राथमिक शाला पैदल जाना पड़ता था. बारिश और गर्मी में उन्हें बहुत परेशानी होती थी. उन्होंने तय किया कि उनके गांव उचवा टोला के वंचित समाज के बच्चों को यह कष्ट नहीं झेलना पड़ेगा. साल 2010 में जब स्कूल की बात आई, तो भवन नहीं था. रामसज्जन ने अपना आधा घर एक कमरा स्कूल के लिए दे दिया. रामसज्जन बताते हैं की मेरे घर में दो ही कमरे हैं. जहां एक कमरे में कक्षा 1 से 5 तक की क्लास लगती है, जिसमें कुल 23 बच्चे हैं. वहीं दूसरे कमरे में परिवार सहित हम रहते हैं. जब स्कूल की छुट्टी हो जाती है, तब हम उस कमरे का इस्तेमाल करते हैं.
कई प्रयास के बाद नहीं मिला स्कूल भवन
रामसज्जन का संघर्ष किसी तपस्या से कम नहीं है. 2010 से वे सांसद, विधायक और मंत्रियों को आवेदन दे रहे हैं. वे तत्कालीन स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस से मिलने भोपाल गए और वहां तीन दिन रहे. मंत्री ने स्कूल ट्रांसफर का आदेश दिया और कहा कि 2-4 महीने वैकल्पिक व्यवस्था कर लो. उस समय के स्थानीय विधायक ने फीता काटकर उद्घाटन भी किया और दावा किया कि 2 महीने में स्कूल बन जाएगा, लेकिन वो 2 महीने 14 साल में बदल गए और स्कूल भवन नसीब नहीं हुआ. रामसज्जन ने आंगे बताया कि मेरा बस एक ही सपना है कि मेरे जीते-जी स्कूल का पक्का भवन बन जाए.
10 दिनों के अंदर स्कूल का निर्माण कार्य शुरू होगा
देर से ही सही लेकिन अब प्रशासन की नींद टूटी है. जिला पंचायत सीईओ की टीम ने मौके का मुआयना किया और रामसज्जन के त्याग को देखकर दंग रह गए. कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने बातचीत के दौरान बताया की रामसज्जन मल्लाह ने बच्चों के हित में जो किया है, वह सम्मान के योग्य है. प्रशासन ने उनका सम्मान किया है. खुशी की बात यह है कि स्कूल भवन अब सैंक्शन हो गया है और अगले 10 दिनों के भीतर स्कूल का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा.
