Mahakal Temple VIP Darshan: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिला स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. वर्तमान में श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन के लिए गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है, जबकि VIP दर्शकों को गर्भगृह में जाने की अनुमति दी जा रही है. इसे लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. SC में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें महाकाल मंदिर में VIP दर्शन व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की गई है. इस पर सुनवाई से सर्वोच्च न्यायालय ने इंकार कर दिया है. SC ने कहा कि जो व्यवस्था चल रही वही चलेगी.
महाकाल मंदिर में VIP दर्शन को लेकर SC ने क्या कहा?
- सुप्रीम कोर्ट ने महाकालेश्वर मंदिर में VIP प्रवेश और दर्शन व्यवस्था को लेकर लगाई गई याचिका को खारिज कर दिया है.
- इस याचिका पर सुनवाई करते हुए CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- ‘महाकाल के सामने कोई भी VIP नहीं है.’
- CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- ‘मुद्दा औचित्य का है. अदालतों को यह तय करने के लिए नहीं कहा जा सकता है कि किसे मंदिर के अंदर जाने की अनुमति है और किसे नहीं.’
- उन्होंने आगे कहा- ‘इसके लिए जिम्मेदार प्राधिकारी और प्राधिकरण हैं. उसे ही इसका प्रबंधन करने दें.’
‘सबको प्रवेश दिया जाए’
सुप्रीम कोर्ट में वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में प्रवेश जिला आयुक्त की सिफारिश के आधार पर दिया जाता है. यहां सभी को प्रवेश देना चाहिए. इस दलील पर कोर्ट की ओर से कहा गया- ‘क्या सभी मौलिक अधिकार गर्भगृह के अंदर ही होंगे? कल आप कहेंगे कि मैं वहां नमाज पढ़ना चाहता हूं.’ कोर्ट ने कहा कि मंदिर के अंदर जाने की अनुमति किसे है और किसे नहीं यह तय करने के लिए अदालत को नहीं कहा जा सकता. इसके लिए जिम्मेदार प्राधिकारी और प्राधिकरण हैं.
क्या है पूरा मामला?
- जुलाई 2023 के बाद महाकाल मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है.
- उस समय सावन में बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया था.
- इतना ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अब तक यह व्यवस्था लागू है और श्रद्धालुओं को गर्भगृह नहीं जाने मिल रहा है.
- जबकि मंदिर के गर्भगृह में VIP दर्शन व्यवस्था लागू है.
- इसे लेकर इंदौर के रहने वाले एक शख्स ने अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की.
- इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इसे खारिज कर दिया.
