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एमपी के सरकारी अस्पतालों में जांच के नाम पर ‘साइंस हाउस’ का फर्जीवाड़ा, दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र

Science House's fraud in the name of investigation in MP's government hospitals, Digvijay Singh wrote a letter to the Health Minister

साइंस हाउस के फर्जीवाड़े पर राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र

MP News: मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जांच के नाम पर साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. कंपनी पर आरोप है कि हॉस्पिटल में जांच की दरें ऊंची रखीं और फर्जी मरीजों के नाम पर करोड़ों का फर्जी बिल बनाया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पूरे फर्जीवाड़े की कहानी टेंडर के दौरान ही शुरू हो गई थी. अब राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को पत्र लिखा है और जांच की मांग की है.

साइंस हाउस ने दी सबसे ज्यादा छूट

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जांच करने के लिए कंपनी का टेंडर जारी किया. इसके लिए कंपनियों ने आवेदन किया. इनमें साइंस हाउस और एल-2 शामिल हैं. साइंस हाउस ने सबसे ज्यादा छूट का प्रावधान रखा. इसके बाद एल-2 कंपनी रही. गड़बड़ी और घोटाले की कहानी तो टेंडर मिलने के बाद शुरू होती है. साइंस हाउस को टेंडर मिला गया, इसके बाद एल-2 कंपनी न्यूबर्ग का विलय हो गया. दोनों कंपनियों ने सरकारी नीतियों को ठेंगा दिखाते हुए पार्टनरशिप में काम शुरू कर दिया.

टेंडर के दौरान बढ़ाई गई 25 फीसदी दरें

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थानों में ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के तहत जांच सेवाएं शुरू करने के लिए 25 मई 2021 को टेंडर जारी किए गए. जांच के लिए जो दरें निर्धारित की गई थीं वह NABL लैब की दरें हैं. NABL प्रमाणित लैब होने का हवाला देते हुए टेंडर में जांच की दरें 25 फीसदी तक बढ़ा दी गईं. पांच सालों में 150 से 200 करोड़ रुपये निजी संस्थानों को दे दिए गए.

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दिग्विजय सिंह ने पत्र में यह मांग की

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले में स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला को पत्र लिखा और तीन मुख्य मांगी की. उनकों मांगों में साइंस हाउस कंपनी के पिछले 5 साल के सभी भुगतान और जांच रिपोर्ट का ऑडिट होना चाहिए. दूसरी मांग- अस्पतालों के रिकॉर्ड और कंपनी के पेश किए डेटा में मिलान होना चाहिए. तीसरी मांग- हेल्थ सर्विस में पारदर्शिता रहे, इसके लिए कड़े मानक और निगरानी तंत्र लागू किए जाने चाहिए.

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