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MP News: मानहानि केस वापसी के बाद पिघली बर्फ! लोकसभा सत्र के बीच शिवराज सिंह चौहान और विवेक तन्खा की मुलाकात

Shivraj Singh Chouhan and Vivek Tankha met in the Lok Sabha premises.

शिवराज सिंह चौहान और विवेक तन्खा की लोकसभा परिसर में मुलाकात हुई.

MP News: लोकसभा सत्र के बीच राजधानी में सियासी गलियारों की एक तस्वीर ने हलचल बढ़ा दी. विवेक तन्खा ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से संसद प्रांगण में मुलाकात की. यह मुलाकात उस समय हुई है, जब हाल ही में तन्खा ने शिवराज पर दायर मानहानि का केस वापस लिया है.

सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों की मध्यस्थता के बाद तन्खा ने सर्वोच्च न्यायालय में मानहानि वाद वापस लेने का निर्णय लिया. इसके बाद दोनों नेताओं की यह पहली सार्वजनिक मुलाकात मानी जा रही है. तन्खा ने सोशल मीडिया पर फोटो साझा करते हुए लिखा, ‘सभी केस समाप्त (सर्वोच्च न्यायालय में मेरे द्वारा वापस लेने के पश्चात) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ संसद प्रांगण में पहली मुलाकात. मध्यप्रदेश मूलतः मित्रता का, न कि शत्रुता का प्रदेश है. पब्लिक लाइफ में हम सबको बड़ा दिल रखना चाहिए.’

पुराने रिश्ते, पुरानी कानूनी लड़ाइयां

दोनों नेताओं के संबंध लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी मोर्चों पर चर्चा में रहे हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान का नाम व्यापम प्रकरण में उछला था. उस समय विवेक तन्खा ने अदालत में कई याचिकाएं दायर कर सरकार को कठघरे में खड़ा किया था. कानूनी हलकों में तन्खा की सक्रियता को लेकर व्यापक बहस हुई थी.

हालांकि, समय के साथ कई मामलों में मध्यस्थता और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए विवादों का समाधान निकला. हालिया मानहानि प्रकरण में भी आपसी सहमति बनने के बाद मामला समाप्त हुआ. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं, बल्कि एक सकारात्मक संदेश भी देती है.

सियासत में नरमी के संकेत?

कांग्रेस और भाजपा भले ही राष्ट्रीय स्तर पर आमने-सामने हों, लेकिन व्यक्तिगत रिश्तों में सौहार्द्र की झलक इस मुलाकात में दिखाई दी. संसद सत्र के बीच हुई यह मुलाकात संकेत देती है कि सार्वजनिक जीवन में वैचारिक मतभेदों के बावजूद संवाद और सम्मान की गुंजाइश बनी रहनी चाहिए.

दिल्ली की इस मुलाकात को मध्यप्रदेश की राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दोनों नेताओं की जड़ें वहीं से जुड़ी हैं. फिलहाल, तस्वीर और संदेश ने यह संकेत जरूर दिया है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच व्यक्तिगत रिश्तों की गर्माहट अभी बाकी है.

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