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MP News: स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा असर, हर साल 8,400 करोड़ यूनिट बिजली की खपत

Electricity Bill Rises Due to Smart Meters

स्‍मार्ट मीटर से बढ़ा बिजली बिल

MP News: मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर एक बार फिर आर्थिक बोझ बढ़ गया है. मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में 4.80 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी है. इस वृद्धि का आधार 2,867 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई बताया गया है, लेकिन इसमें स्मार्ट मीटर से जुड़ी 821 करोड़ रुपये की लागत भी शामिल किए जाने से विवाद खड़ा हो गया है.

जानकारी के अनुसार, स्मार्ट मीटर की लागत को सीधे बिजली बिल में अलग से नहीं दिखाया गया है, बल्कि इसे दरों में ही शामिल कर लिया गया है. इस 821 करोड़ रुपये में 514 करोड़ रुपये लीज किराया और 307 करोड़ रुपये संचालन व रखरखाव खर्च शामिल हैं, जो निजी कंपनियों को भुगतान किए जाएंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि यह राशि उपभोक्ताओं से छिपे हुए शुल्क के रूप में वसूली जा रही है.

हर यूनिट पर करीब 10 पैसे का अतिरिक्त भार

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, यदि स्मार्ट मीटर की लागत को दरों में शामिल नहीं किया जाता, तो बिजली दरों में लगभग 10 पैसे प्रति यूनिट तक की कमी संभव थी. प्रदेश में हर वर्ष करीब 8,400 करोड़ यूनिट बिजली की खपत होती है, ऐसे में यह अतिरिक्त बोझ सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई घरेलू उपभोक्ता हर महीने 300 यूनिट बिजली उपयोग करता है, तो उसे लगभग 30 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा. वहीं, एक लाख यूनिट बिजली उपयोग करने वाले औद्योगिक उपभोक्ता को हर महीने करीब 10,000 रुपये अधिक चुकाने पड़ सकते हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन उपभोक्ताओं के यहां अभी स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, उन्हें भी यह अतिरिक्त राशि देनी होगी.

ऊर्जा मंत्री के बयान से उठे सवाल

इस मामले में प्रद्युमन सिंह तोमर के पूर्व बयान पर भी सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने 27 फरवरी 2026 को विधानसभा में कहा था कि स्मार्ट मीटर के लिए उपभोक्ताओं से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है, लेकिन अब नई दरों में इस लागत को शामिल करने से अप्रत्यक्ष वसूली का मामला सामने आया है.

दो चरणों में लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर

प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य दो चरणों में किया जा रहा है. पहले चरण में 58 लाख 65 हजार 372 और दूसरे चरण में 82 लाख 78 हजार 747 मीटर लगाए जाएंगे. इस प्रकार कुल 1 करोड़ 41 लाख 44 हजार 119 स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. अभी तक लगभग 20 लाख मीटर लगाए जा चुके हैं. सभी मीटर लगाने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2028 तय की गई है.

बिजली मामलों के एक्सपर्ट राय

बिजली मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की लागत को पारदर्शी तरीके से अलग दिखाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी मिल सके. दरों में छिपाकर जोड़ने से उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनती है. कुल मिलाकर, बिजली दरों में 4.80 प्रतिशत की वृद्धि और उसमें स्मार्ट मीटर की लागत शामिल होने से प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ना तय माना जा रहा है.

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