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धार भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों होगी, विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पढ़िए SC ने आदेश में क्या कहा

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धार भोजशाला विवाद पर SC का फैसला

Dhar Bhojashala Controversy: मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित भोजशाला में पूजा या नमाज के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. SC ने कहा कि बेहतर होगा कि ऐसे इतंजाम हो कि दोनों समुदाय के लोग पूजा या नमाज कर सकें. सर्वेोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) पेश हुए. वहीं, मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद और याचिकाकर्ता की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील पेश की.

भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा मामला?

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इस याचिका में 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज से रोकने और सिर्फ हिंदूओं को ही मां सरस्वती की पूजा-अर्चना देने की इजाजत की मांग की गई थी.

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धार भोजशाला विवाद क्या है?

मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित भोजशाला एक ऐतिहासिक स्थल है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है. ASI ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है. इतिहासकारों का मानना है कि भोजशाला का निर्माण राजा भोज द्वारा किया गया था. ये स्थान शिक्षा और ज्ञान का केंद्र था, जहां देवी सरस्वती की उपासना होती थी. वहीं, मुस्लिम समुदाय इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद के रूप में मानता है. साथ ही यहां लंबे समय से यहां नमाज अदा करते आ रहा है. इतिहासकारों का कहना है कि मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती की दरगाह और मजार तो अहमदाबाद में है. भोजशाला में कब्जा करने के उद्देश्य से यह दरगाह बनाई गई है.

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अलग-अलग धार्मिक दावों की वजह से भोजशाला विवादों में हमेशा से रहा है. साल 2003 में ऐसी व्यवस्था की गई कि मंगलवार को हिंदू पक्ष यहां पूजा कर सकते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा सकते हैं. साल 2024 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस विवाद पर SAI को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने का आदेश दिया. ASI के शुरुआती सर्वे में भोजशाला में मंदिर के अवशेष मिलने की बात सामने आई. वहीं, इस सर्वे पर आखिरी फैसला अभी भी कोर्ट के अधीन है.

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