Input- मनोज शर्मा
MP News: चंबल में अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश 3 राज्यों की सरकारों से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल छोटे वाहनों और ड्राइवर को पकड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि खनन सिंडिकेट की बड़ी मछलियों तक पहुंचने की जरूरत है.
कोर्ट ने पूछा- अवैध खनन और भारी वाहनों की आवाजाही से कितना असर?
चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने तीन राज्यों से जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान मुरैना-धौलपुर बॉर्डर पर बने राजघाट पुल की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से पुल की सुरक्षा और भारी वाहनों के दबाव को लेकर विस्तृत हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने पूछा कि लगातार हो रहे अवैध खनन और भारी वाहनों की आवाजाही से पुल की संरचना पर कितना असर पड़ रहा है.
कोर्ट में MP सरकार बोली- कार्रवाई लगातार जारी
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि जंगल और अभयारण्य क्षेत्रों में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों पर निगरानी बढ़ाई गई है. साथ ही लगातार चालानी कार्रवाई की जा रही है. वहीं एमपी, यूपी और राजस्थान सरकारों ने संयुक्त रूप से कोर्ट में GPS ट्रैकिंग और CCTV निगरानी का रोडमैप भी प्रस्तुत किया.
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने स्वत: संज्ञान लिया
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जस्टिस विक्रमानाथ और मंदीप मेहता की बेंच ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि चंबल अभयारण्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अवैध खनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मामले में अगली सुनवाई के दौरान 26 मई को विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा.
ये भी पढ़ें: धार्मिक गीत पर झूमती दिखीं ट्विशा, नया Video वायरल; दोबारा पोस्टमार्टम के लिए हाई कोर्ट जाएगा परिवार
