Indore Water Crisis: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर हाई कोर्ट में आज सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए 15 जनवरी को प्रदेश के मुख्य सचिव को तलब करने के निर्देश दिए हैं. दूषित पानी मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और जनहित याचिका की सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि मामले में प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय की जानी आवश्यक है.
2 जनवरी को कोर्ट में पेश हुई थी स्टेटस रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार, यह जनहित याचिका एडवोकेट रितेश इनानी एवं पूर्व पार्षद महेश गर्ग और प्रमोद द्विवेदी द्वारा एडवोकेट मनीष यादव के माध्यम से दायर की गई है. गत 2 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी. इस रिपोर्ट में इस मामले में 4 लोगों की मौत को दर्शया गया था, जबकि उस समय भी मौतों का आंकड़ा इससे अधिक था. अब यह संख्या बढ़कर 17 हो चुकी है.
15 जनवरी को मुख्य सचिव को तलब के निर्देश
आज जस्टिस विजय कुमार शुक्ला एवं जस्टिस आलोक अवस्थी की नियमित डिवीजन बेंच में पहली बार इस मामले की सुनवाई हुई. एडवोकेट इनानी ने बताया कि कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 15 जनवरी को प्रदेश के मुख्य सचिव को उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं.
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इंदौर में गंदा पानी पीने से 17 लोगों की मौत
शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है. इस पूरे मामले में एक महिला में जीबीएस (गुइलेन-बैरे सिंड्रोम) नामक बीमारी की पुष्टि हुई है. यह एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी है, जो गंदा पानी पीने की वजह से होती है. इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ्य की सभी तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है.
