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Rewa News: एमपी में सबसे अधिक रीवा से एयरलिफ्ट हुए मरीज, 32 जिलों का नहीं खुला खाता

Prime Minister Air Ambulance Service

प्रधानमंत्री एयर एंबुलेंस सेवा

Rewa News: मध्य प्रदेश में मरीजों की सुविधा के लिए शुरू की गई पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा का सबसे अधिक लाभ रीवा जिले के लोगों को मिला है. अब तक प्रदेश में 127 मरीजों को अलग-अलग शहरों से एयरलिफ्ट कर बड़े शहरों के अस्पतालों में पहुंचाया गया है, जिसमें रीवा जिले के सबसे अधिक 44 मरीज शामिल हैं. प्रदेश के पहले मरीज की शुरुआत भी रीवा से ही हुई थी. वहीं 32 जिले ऐसे हैं, जहां से अब तक किसी मरीज को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है.

एक साल में 69 मरीजों को किया एयरलिफ्ट

पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा में मई 2024 से मई 2025 के दौरान कुल 69 रोगियों को एयरलिफ्ट कर उपचार के लिए भेजा गया, जिसमें औसतन 6 रोगी प्रतिमाह रहे. शुरुआती दौर में योजना को लेकर मरीजों में जागरूकता कम रही. धीरे-धीरे इसमें संख्या बढ़ी है और बीते 19 जुलाई 2025 से 19 जनवरी 2026 तक करीब 6 माह की अवधि में कुल 58 रोगियों का एयरलिफ्ट कर बड़े अस्पतालों तक पहुंचाया गया, जो कि औसतन 10 रोगी प्रतिमाह है. प्रशासन का दावा है कि एयर एंबुलेंस सेवा के उपयोग में प्रतिमाह लगभग 67 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.

इन जिलों में सेवा का नहीं मिला लाभ

प्रदेश के जिन जिलों के मरीजों को पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिला है, उसमें प्रमुख रूप से रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी, मैहर, उज्जैन में आगर मालवा, देवास, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर, इंदौर में अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, झाबुआ, खरगोन, जबलपुर में छिंदवाड़ा, मंडला, सिवनी, पंढुर्ना, ग्वालियर में अशोक नगर, शिवपुरी, दतिया, गुना, चंबल संभाग में मुरैना, श्योपुर, भिंड, भोपाल में सीहोर, राजगढ़, रायसेन, सागर में टीकमगढ़, निवाड़ी एवं शहडोल संभाग में शहडोल और उमरिया शामिल हैं. रीवा में सबसे अधिक संख्या के पीछे का भी यही कारण है कि यहां दूसरे जिलों से मरीज आते हैं और यहां से भोपाल, इंदौर और दूसरे शहरों के लिए एयर एंबुलेंस से भेजे जाते हैं.

योजना के प्रावधान

एयर एंबुलेंस सेवा का लाभ उन मरीजों को मिलता है, जिनका उपचार उनके पास के अस्पतालों में संभव नहीं हो और उन्हें आपात स्थिति में तुरंत जिले अथवा राज्य से बाहर पहुंचाना हो. इसके लिए उपचार कर रहे डॉक्टर, सीएमएचओ और कलेक्टर की अनुशंसा जरूरी होती है. प्रदेश के बाहर यदि मरीज को ले जाना है, तो चिकित्सा शिक्षा के संचालक की भी अनुशंसा लेनी होती है.

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