MP News: सड़क किसी भी इलाके के विकास की पहली सीढ़ी मानी जाती है. कहा जाता है कि जहां सड़क पहुंची, वहां विकास अपने आप पहुंच जाता है. लेकिन जब योजनाएं कागजों में दौड़ें और ज़मीन पर ठहर जाएं, तो विकास भी सवालों के घेरे में आ जाता है. ऐसे में विकास को ताक पर रखने वाला मामला उमरिया जिले के अखडार क्षेत्र में देखा गया है, जहां सेतु निगम द्वारा लगभग 3 करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से बनाया गया एक पुल सिर्फ इसलिए बेकार साबित हो रहा है क्योंकि उसे जोड़ने वाली सड़क ही नहीं बनाई गई.
पुल तो बन गया लेकिन सड़क बनाना भूल गए
यह पुल क्षेत्रवासियों के लिए उम्मीद की एक बड़ी किरण था. लंबे संघर्ष के बाद इसकी स्वीकृति मिली और पुल का निर्माण भी पूरा हो गया, लेकिन सड़क बनाना जैसे भूल ही गए. यह पुल सैकड़ों गांवों को कटनी और जबलपुर जैसे बड़े शहरों से जोड़ने वाला था, जिससे आवागमन आसान होता और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलती. लेकिन निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही ने इस सपने को अधूरा ही छोड़ दिया.
10 सालों तक नहीं बनी 200 मीटर की रोड़
हैरानी की बात यह है कि साल 2016 में पुल बनकर तैयार हो गया था, लेकिन महज 200 मीटर की एप्रोच रोड 10 वर्ष बाद भी नहीं बन पाई. इसका खामियाजा आज भी आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जो जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से सफर करने को मजबूर हैं. कभी लोग परिवार के सदस्यों को वाहन से नीचे उतारकर खराब रास्ता पार करते हैं, तो कभी ऑटो और अन्य वाहनों को धक्का देकर सड़क पर चढ़ाते नजर आते हैं.
पुल के एक ओर कटनी जिला है तो दूसरी ओर उमरिया जिला, लेकिन विकास के इस पुल पर आज भी आम जनता का सफर संघर्ष भरा बना हुआ है. करोड़ों की लागत से बने इस पुल का पूरा लाभ सड़क के अभाव में नहीं मिल पा रहा है, और यह लापरवाही सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
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