MP News: मऊगंज में कलेक्ट्रेट के लिए उजाड़ दिए आशियाने! PM आवास भी ढहा दिया, 7 आदिवासी परिवार बेघर

सवाल है कि क्या विकास की कीमत गरीबों का उजड़ा घर होगा? क्या सरकारी योजना के तहत बने मकान भी अब सुरक्षित नहीं? फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं.
The houses of tribals were demolished for the construction of the Collectorate in Mauganj.

मऊगंज में कलेक्ट्रेट निर्माण के लिए आदिवासियों के घर उजाड़ दिए गए.

MP News: मऊगंज जिले के वार्ड क्रमांक 11 में शनिवार सुबह विकास के नाम पर ऐसी कार्रवाई हुई, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए. तहसील के पास बन रहे कलेक्ट्रेट भवन के लिए प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ पहुंचा और बुलडोजर चलाकर सात आदिवासी परिवारों के घरों को जमींदोज कर दिया. इस कार्रवाई में वे मकान भी शामिल थे, जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए थे और जिनकी जियो टैगिंग भी हो चुकी थी.

‘दस्तावेजों को भी नजरअंदाज कर चला दिया बुलडोजर’

पीड़ितों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा आवंटित जमीन पर उन्होंने वैध तरीके से अपने घर बनाए थे. कार्रवाई के दौरान परिवारों ने अपने दस्तावेज अधिकारियों को दिखाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक अमले ने उन्हें नजरअंदाज करते हुए बुलडोजर चलवा दिया. देखते ही देखते वर्षों की मेहनत और सपनों का आशियाना मलबे में तब्दील हो गया.

इस कार्रवाई के बाद सात परिवार भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं. उनके पास अब न सिर छुपाने को छत है और न ही खाने-पीने का कोई ठिकाना. इस घटना से करीब दो दर्जन से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं.

‘कलेक्ट्रेट भवन निर्माण में बाधा आ रही थी’

स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई को लेकर भारी आक्रोश है. उनका कहना है कि बिना पर्याप्त नोटिस, बिना वैकल्पिक व्यवस्था और बिना सुनवाई के प्रशासन ने यह कदम उठाया है. जब मीडिया ने अधिकारियों से जवाब लेना चाहा, तो वे कैमरे से बचते नजर आए. वही मऊगंज एसडीएम एपी द्विवेदी से जब फोन पर बात की गई तो उनका कहना था कि यहां पर अवैध रूप से घर बने थे और कलेक्ट्रेट भवन के निर्माण में बाधा आ रही थी, जिसकी वजह से यह बुलडोजर की कार्रवाई की गई.

विकास की कीमत गरीबों का उजड़ा घर होगा?

अब सवाल है कि क्या प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कार्य हो रहा था तो नगर परिषद जियोटेक कर रही थी और पेमेंट आया तब क्यों रोक नहीं लगाई गई. जब भवन कंप्लीट हो गया, उसके बाद बुलडोजर की कार्रवाई क्यों की गई. इसकी भरपाई कौन करेगा. इस कार्रवाई ने प्रधानमंत्री के सभी को आवास देने के सपनों के साथ-साथ उन गरीबों के सपनों को भी चकनाचूर कर दिया है.

सवाल अभी भी बाकी हैं कि क्या विकास की कीमत गरीबों का उजड़ा घर होगा? क्या सरकारी योजना के तहत बने मकान भी अब सुरक्षित नहीं? फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, जबकि यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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