Dewas Liquor Case: मध्य प्रदेश के देवास जिले में जहरीली शराब पीने से हुई 13 लोगों की मौत के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है. चंदाना और बिंदाना गांव में बेची जाने वाली नकली शराब इस मामले में मुख्य आरोपी अजय राठौर के घर पर बनाई जाती थी. इसे लाइसेंसी शराब की पेटी में भरकर गांवों तक सप्लाई की जाती थी. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और शराब बनाने से लेकर सप्लाई तक के पूरे नेटवर्क के बारे में पता लगाने के लिए जुटी हुई है. अब तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
AI से सीखा नकली शराब बनाना
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने 27-28 सितंबर को आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस (AI) की मदद से नकली शराब बनाने का तरीका खोजा. इसके बाद इंदौर के दवा बाजार से केमिकल की खेप मंगायी गई, जिसकी डिलीवरी 1-2 अक्टूबर को पुआड़ा दाई स्थित घर पर हुई. इसके बाद 2 अक्टूबर से लेकर 7 अक्टूबर तक शराब बनाई गई. इसे बनाने में लोहार पिपलिया में रहने वाले गोविंद और गधेशिया पिपलिया निवासी रामेश्वर का नाम सामने आया है.
शराब की सप्लाई कैसे की जाती थी?
पुलिस पूरे शराब नेटवर्क की जांच कर रही है. चंदाना गांव में रहने वाले विनोद जायसवाल तक कैसे शराब पहुंचाई जाती थी. इस बारे में भी पड़ताल की जा रही है. इस मामले में जितेंद्र मालवीय और राहुल गिरी गोस्वामी के नाम सामने आए हैं. दोनों पर आरोप है कि सरकारी ठेके से मिलने वाली लाइसेंसी शराब में नकली शराब मिलाकर विनोद जायसवाल तक पहुंचायी जाती थी. अजय, रामेश्वर और गोविंद के भी नाम सामने आए हैं, जिनसे सस्ते दाम पर शराब मंगाई जाती थी. शराब गांवों और मोहल्लों में बेची जाती थी.
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कबाड़ी से खरीदी गई बोतलें
नकली शराब भरने के लिए बोतलें को कबाड़ियों से खरीदा गया. वहीं, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इंदौर स्थित केमिकल की गोदाम को सील कर दिया है. पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है.
