Ujjain Shahi Masjid: उज्जैन में शाही मस्जिद कमेटी द्वारा दायर अपील को इंदौर हाई कोर्ट की डबल बैंच ने खारिज कर दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण परिजयोजना के तहत मस्जिद के एक हिस्से को तोड़ने के लिए प्रशासन को अनुमति देने वाले आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया है. कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन सड़क चौड़ीकरण का काम जारी रख सकता है और मस्जिद के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ा सकता है.
शाही मस्जिद कमेटी ने प्रशासन के प्रधिकरण के आदेश के खिलाफ निचली अदालत में अपील दायर की थी. इस अपील में मस्जिद के हिस्से को तोड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई थी. हालांकि इंदौर हाई कोर्ट की डबल बैंच ने इस अपील को स्वीकार नहीं किया और इसको खारिज कर दिया.
हाई कोर्ट ने खारिज की अपील
दरअसल, उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को तोड़ने पर शाही मस्जिद कमेटी ने प्रशासन की संभावित कार्रवाई के खिलाफ इंदौर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. कमेटी ने कोर्ट में अपील दायर करते हुए अपनी प्रमुख मांग रखी थी कि मस्जिद का हिस्सा गिराए जाने से रोका जाए. हालांकि काेर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों पर को सुनकर उस पर विचार किया और कमेटी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया.
कोर्ट के अपील पर अपनाए इस कड़े रुख के बाद स्थानीय प्रशासन को सड़क चौड़ीकरण करने में बड़ी राहत मिली है. प्रशासन ने इस परियोजना को सुचारु रुप से जारी रखने के लिए मस्जिद के एक हिस्से को हटाने का आदेश दिया था. हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाने से साफ मना कर दिया, जिसके बाद प्रशासन की निर्धारित योजना के तहत कार्रवाई का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है.
क्या है शाही मस्जिद मामला?
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेजी से चल रही है. ऐसे में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबे रास्ते को 15 मीटर और चौड़ा करने की प्रक्रिया चल रही है. इस चौड़ीकरण के दायरे में सात धार्मिक स्थलों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से कई प्रभावित हिस्सों को पहले ही हटाया जा चुका है. इसके पहले भी बोहरा समाज की आपसी सहमति से मस्जिद को हटाया गया था, लेकिन अब शाही मस्जिद के हिस्से को लेकर विवाद गहरा गया है.
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