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ओंकारेश्वर में दो दिन का बंद: भगवान को चढ़ाने के लिए फूल-प्रसाद तक नहीं मिले, कलेक्टर ने कहा..

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ओंकारेश्वर

Omkareshwar Temple Visitor Drop: मध्य प्रदेश की पवित्र तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में स्थानीय नागरिक परिषद के आह्वान पर दो दिवसीय बंद का व्यापक और गहरा असर देखने को मिला. स्थानीय दुकानदारों, होटल व गेस्ट हाउस संचालकों, व्यापारियों और ऑटो चालकों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में प्रतिष्ठान पूरी तरह से बंद रखे. इसका सीधा असर दूर-दराज से आने वाले उन हजारों श्रद्धालुओं पर पड़ा, जो भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन की आस लेकर पहुंचे थे. आलम यह रहा कि भक्तों को भगवान को अर्पित करने के लिए न तो फूल मिले और न ही प्रसाद. वहीं, इस पूरे घटनाक्रम और विरोध के बीच खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता का अहम बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने आगामी सिंहस्थ की तैयारियों और स्थानीय लोगों की चिंताओं पर प्रशासन का रुख स्पष्ट किया है.

सन्नाटे में तब्दील हुई तीर्थनगरी

आम दिनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, दुकानों की चहल-पहल और हर-हर महादेव के जयकारों से गुलजार रहने वाली यह नगरी बंद के दौरान पूरी तरह से सन्नाटे में डूबी नजर आई. बाजार बंद रहने से न केवल स्थानीय कारोबार पूरी तरह ठप हो गया, बल्कि बाहर से आए श्रद्धालुओं को भी कदम-कदम पर दिक्कतों का सामना करना पड़ा. ऑटो सेवाएं बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को बस स्टैंड से मंदिर तक का लंबा सफर पैदल ही तय करना पड़ा. इसके अलावा, खाने-पीने और जरूरत की अन्य सामग्री हासिल करने में भी लोगों को भारी जद्दोजहद करनी पड़ी.

पहली बार आए श्रद्धालुओं को हुई निराशा

दिल्ली से पहली बार ओंकारेश्वर के दर्शन करने पहुंचीं श्रद्धालु साईं दीपा ने अपनी निराशा जाहिर की. उन्होंने बताया कि यहां पहुंचने पर ही उन्हें पता चला कि स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है. तीर्थनगरी में ऐसा माहौल देखकर उन्हें काफी दुख हुआ. दीपा का कहना था कि सरकार को स्थानीय लोगों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और उनके व्यवसाय को सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि भविष्य में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को इस तरह की परेशानी न हो.

एक अन्य श्रद्धालु आकाश गर्ग, जो दिल्ली से ही आए थे, उन्होंने बताया कि भगवान को प्रसाद चढ़ाने की उनकी बड़ी इच्छा थी, लेकिन प्रसाद की सभी दुकानें बंद होने के कारण उन्हें बिना प्रसाद चढ़ाए ही दर्शन करने पड़े. आकाश ने कहा कि यहां कई परिवार पीढ़ियों से अपना व्यवसाय कर रहे हैं और तीर्थनगरी की धार्मिक गतिविधियों में उनका अहम योगदान है. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन और स्थानीय नागरिकों को बातचीत की मेज पर बैठकर कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए, जिससे लोगों का रोजगार भी न छिने और श्रद्धालुओं की सुविधाएं भी प्रभावित न हों.

कलेक्टर का बयान आया सामने

इस पूरे विवाद के मूल में आगामी सिंहस्थ की तैयारियां और स्थानीय लोगों के विस्थापन का डर है. इस मामले में खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया है कि ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में आने वाले समय में सिंहस्थ आयोजित होने वाला है. सिंहस्थ के सुचारू आयोजन के लिए कुछ होल्डिंग एरियाज, क्राउड कंट्रोल (भीड़ नियंत्रण) के लिए जगहें और यूटिलिटी ब्लॉक्स (जैसे टॉयलेट्स और पीने के पानी की जगहें) बनाने की आवश्यकता है. इन सुविधाओं को विकसित करने के कारण क्षेत्र में कुछ चौड़ीकरण करने की संभावनाएं बन रही हैं.

कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने स्पष्ट किया कि ओंकारेश्वर के शहरवासियों द्वारा प्रशासन को कुल 18 बिंदु सौंपे गए थे, जिनमें उनकी मांगें और चिंताएं शामिल थीं. प्रशासन ने इन सभी 18 के 18 बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया है और लगभग सभी बातों पर सहमति बन गई है. एक प्रमुख मुद्दा ‘डुइकिया’ में पुनर्विस्थापन की जगह को लेकर था, जो स्थानीय लोगों को थोड़ी दूर लग रही थी. इस पर भी चर्चा हो गई है और कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि डुइकिया कोई अंतिम विकल्प नहीं है. सभी के साथ मिलकर नई जगह का चयन भी किया जा सकता है.

इसके अलावा, कलेक्टर ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वहां पर अभी टू लेन रोड का निर्माण होने वाला है, जो आगे चलकर फोर लेन से सीधा जुड़ जाएगा। जब तक यह सड़क निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार की विस्थापन की कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस बात का पक्का आश्वासन सभी आमजनों को दे दिया गया है.

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