Vistaar NEWS

‘महिला आश्रम पूरी तरह सुरक्षित नहीं…’, साध्‍वी हर्षानंद गिरी का बड़ा बयान, कहा- कोई संत जिम्मेदारी ले तो मैं आश्रम में रहने के लिए तैयार हूं

Harsha Richharia, alias Swami Harshanand Giri

हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि

Ujjain News: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने गुरु महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि महाराज के दर्शन-पूजन के लिए उज्जैन पहुंचीं मॉडल-इन्फ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं के लिए एक भी आश्रम ऐसा नहीं है, जिसे पूरी तरह सुरक्षित कहा जा सके. उनका कहना था कि यदि कोई संत उन्हें बेटी समान मानकर जीवनभर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का भरोसा दे, तो वे उसी आश्रम को अपना स्थायी ठिकाना बनाने के लिए तैयार हैं.

गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन आने का कारण बताया

गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन आने का कारण बताते हुए हर्षानंद ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा की शुरुआत उज्जैन से हुई है. इसलिए इस अवसर पर गुरु का आशीर्वाद लेना उनके लिए विशेष महत्व रखता है. संन्यास लेने के बाद भी माता-पिता के घर में रहने और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने को लेकर उठ रहे सवालों पर भी उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी.

माता-पिता का घर और गुरु आश्रम ही सबसे सुरक्षित

उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास दो ही ठिकाने हैं. एक उनके गुरु का आश्रम और दूसरा उनके माता-पिता का घर. कुछ दिन गुरु के आश्रम में रहने के बाद माता-पिता की सुरक्षा में घर पर रहना उन्हें अधिक उचित लगता है. उनका कहना था कि जब तक उनका स्वयं का कोई स्थायी स्थान नहीं होगा, तब तक यही दोनों स्थान उनके लिए सबसे सुरक्षित हैं.

महिलाओं की सुरक्षा पर जताई चिंता

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि आज के समय में कौन ऐसा संत है, जो यह भरोसा दिला सके कि “हर्षानंद मेरी बेटी के समान है और मैं जीवनभर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता हूं.” उन्होंने कहा कि यदि कोई संत ऐसा आश्वासन देता है, तो वे बिना किसी संकोच के उसी आश्रम में रहने लगेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में महिलाओं के लिए किसी भी आश्रम को पूरी तरह सुरक्षित कहना मुश्किल है.

श्रृंगार और ब्यूटी पार्लर पर दिया जवाब

साध्वी हर्षानंद ने अपने श्रृंगार और ब्यूटी पार्लर जाने को लेकर उठने वाले सवालों का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि जो लोग इस पर आपत्ति जताते हैं, उनमें से कई संत अपने आश्रमों में ही ब्यूटी संबंधी सेवाएं लेते हैं. उनका मानना है कि माता लक्ष्मी और भगवान नारायण स्वयं सुंदर स्वरूप में विराजमान हैं, इसलिए उनकी आराधना करने वाला व्यक्ति भी स्वच्छ, सुसज्जित और व्यवस्थित रह सकता है. यह केवल सोच का अंतर है.

वेशभूषा और संन्यास को लेकर उठ रहे सवाल

साध्वी हर्षानंद के संन्यास के बाद उनकी वेशभूषा, श्रृंगार और ब्यूटी पार्लर जाने को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस जारी है. कुछ लोगों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति साध्वी का जीवन अपनाता है और सांसारिक जीवन का त्याग कर तपस्या के मार्ग पर चलता है, तब उसे मोह-माया और बाहरी सुंदरता से भी दूरी बना लेनी चाहिए. ऐसे में श्रृंगार और सौंदर्य पर ध्यान देना संन्यास के मूल स्वरूप के विपरीत माना जा रहा है. वहीं, साध्वी हर्षानंद का कहना है कि स्वच्छ और सुसज्जित रहना उनकी व्यक्तिगत सोच का हिस्सा है और इसका संन्यास से कोई विरोधाभास नहीं है.

ये भी पढे़ं- Ujjain: महाकाल अन्नक्षेत्र में अब मिलेगा दक्षिण भारतीय प्रसाद, सप्ताह में दो दिन श्रद्धालुओं को परोसी जाएंगी खास डिशेज

Exit mobile version