Ujjain News: उज्जैन में दुष्कर्म के आरोपों से घिरे निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदास की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. स्थानीय अखाड़ा परिषद ने उन्हें साधु समाज से निष्कासित कर दिया है. साथ ही परिषद ने अपने अधीन आने वाले सभी मठों, आश्रमों और अखाड़ों में होने वाले धार्मिक आयोजनों में उनके प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. परिषद ने निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास महाराज को पत्र भेजकर ज्ञानदास को महामंडलेश्वर पद से तत्काल हटाने की मांग की है.
महाकाल थाने में दर्ज हुआ मामला
महाकाल थाना पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर ज्ञानदास के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है. इसके बाद स्थानीय अखाड़ा परिषद की बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया. परिषद का कहना है कि ऐसे गंभीर आरोप संत समाज की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं.
महिला ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि उसकी मुलाकात करीब डेढ़ साल पहले सदावल रोड स्थित दादू आश्रम में ज्ञानदास से हुई थी. इसके बाद दोनों के बीच मोबाइल और फेसबुक के माध्यम से संपर्क बना रहा. महिला का कहना है कि धार्मिक आस्था के चलते उसने उन पर भरोसा किया और बातचीत जारी रखी.
प्रसाद में खीर खिलाने के बाद दुष्कर्म का आरोप
महिला के मुताबिक, गुरु पूर्णिमा 2025 के दौरान ज्ञानदास ने उसे आश्रम बुलाया और सेवा कार्यों से जोड़ने के बहाने कुछ दिन वहीं रुकने को कहा. आरोप है कि एक रात प्रसाद के रूप में खीर खिलाने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया. अगले दिन उसे घटना का एहसास हुआ, जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
वायरल दस्तावेज और चैट की भी जांच
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर ज्ञानदास के कुछ फोटो, एक कथित मैरिज सर्टिफिकेट और व्हाट्सएप चैट भी वायरल हुई हैं. वायरल दस्तावेज में वर्ष 2021 में एक महिला से विवाह का दावा किया गया है, जबकि चैट में महिला द्वारा गर्भवती होने का उल्लेख होने की बात सामने आई है. हालांकि इन फोटो, दस्तावेजों और चैट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस इन सभी पहलुओं की भी जांच कर रही है.
