Ujjain News: देशभर में स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है, लेकिन महाकाल नगरी उज्जैन में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है जहां इस बार आजादी का उत्सव 11 अगस्त को ही मनाया जाएगा. महाकाल मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित करीब 125 साल पुराना बड़े गणेश मंदिर में अंग्रेजी तारीख नहीं, बल्कि वैदिक तिथि के अनुसार राष्ट्रीय पर्व मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है.
मंदिर के पुजारी ने दी जानकारी
मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य पंडित अक्षय व्यास के अनुसार भारत को जिस दिन आजादी मिली थी, उस दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी. इस वर्ष यह तिथि 11 अगस्त को पड़ रही है, इसलिए मंदिर में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन उसी दिन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि जैसे रक्षाबंधन, होली और दीपावली वैदिक तिथियों के अनुसार मनाई जाती हैं, वैसे ही यहां राष्ट्रीय पर्व भी वैदिक तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं. इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सम्मान बनाए रखना है.
परंपरा के पीछे जुड़ी है मान्यता
परंपरा के पीछे यह मान्यता भी जुड़ी है कि विश्वविख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित नारायण व्यास ने स्वतंत्र भारत की घोषणा के लिए शुभ मुहूर्त और तिथि का निर्धारण किया था. कहा जाता है कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के आग्रह पर पंचांग के आधार पर श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शुभ माना गया था. बाद में 15 अगस्त 1947 इसी वैदिक तिथि के अनुरूप पड़ा. इसी तरह संविधान लागू होने के लिए भी माघ शुक्ल अष्टमी तिथि का महत्व बताया जाता है, जो अंग्रेजी कैलेंडर में 26 जनवरी 1950 थी.
क्या होंगे कार्यक्रम?
11 अगस्त की सुबह भगवान बड़े गणेश का अभिषेक और विशेष पूजन होगा. इसके बाद भव्य ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, भारत माता का पूजन और स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी. इस अवसर पर देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रसाद वितरण भी होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है.
मंदिर समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि वैदिक परंपरा के अनुसार पर्व मनाने से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलता है. हर साल इस आयोजन में उज्जैन के अलावा आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रशासन ने भी कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं.
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