हिंदू धर्म में सावन के महीने को सबसे पवित्र माना गया है. पूरे साल में ये महीना सबसे पवित्र माना गया है. इस माह में पूरे देशभर में हर मंदिर और घर में भगवान शिव की आराधना की जाती है. इस माह में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भी भक्तों का जमावड़ा लगता है. इस साल पूरे पर्व के दौरान करीब 2 करोड़ श्रद्धालुओं के संभावना है. इस बार सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 8 अगस्त 2026 तक रहेगा.
दर्शन व्यवस्था और आरती के समय में बदलाव
इसी को ध्यान में रखते हुए दर्शन व्यवस्था, प्रदेश और निकास मार्ग, पार्किंग, कांवड़ यात्रियों की सुविधा, जल अर्पण, पेयजल, जूता स्टैंड और भस्म आरती की समय सारणी सहित सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया है, ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के सुरक्षित और सुगम दर्शन मिल सकें.
श्रद्धालुओं के लिए मुख्य प्रवेश मार्ग
इसके बारे में मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि इस बार त्रिवेणी संग्रहालय की ओर से आने वाला मार्ग श्रद्धालुओं के लिए मुख्य प्रवेश मार्ग रहेगा. यहां से श्रद्धालु नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1, टनल, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम होते हुए भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे. नीलकंठ प्रवेश द्वारा से आने वाले श्रद्धालु भी मानसरोवर भवन के रास्ते इसी मार्ग से प्रवेश करेंगे और दर्शन के बाद निर्माल्य द्वार अथवा आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलेंगे.
पट खुलने का समय बदला
पट खुलने के समय में भी बदलाव किया गया है. श्रावण-भादौ पर्व के दौरान 30 जुलाई से 7 सितंबर तक मंदिर के पट प्रतिदिन सुबह 3 बजे खुलेंगे, जबकि प्रत्येक सोमवार को मंदिर के पट सुबह 2:30 बजे खोले जाएंगे. प्रतिदिन सुबह 3 से 5 बजे तक भस्म आरती होगी, जबकि सोमवार को यह सुबह 2:30 से 4:30 बजे तक संपन्न होगी. 8 सितंबर से मंदिर की समय-सारिणी फिर सामान्य हो जाएगी.
कब निकलेगी बाबा महाकाल की पहली सवारी
श्रावण-भादौ में बाबा महाकाल की सवारियों का शुभारंभ 3 अगस्त से होगा. इसके बाद 10, 17 और 24 अगस्त को श्रावण मास की सवारियां निकलेंगी. वहीं 31 अगस्त को पंचम सवारी और 7 सितंबर को भगवान महाकाल की पारंपरिक राजसी सवारी पूरे वैभव के साथ नगर भ्रमण पर निकलेगी.
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