UCC: एमपी में लिव-इन के लिए करना होगा रजिस्ट्रेशन! UCC की तैयारियों के बीच बदल सकते हैं नियम
सांकेतिक तस्वीर
MP UCC News: मध्य प्रदेश में सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की तैयारी में जुट गई है. इस कानून के तहत शादी, तलाक, संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है. सरकार ने कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कमेटी काे मंजूरी दे दी है. इस ड्राफ्ट की पूरी जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई को दी जा सकती है.
लिव-इन वालों को कराना होगा रजिस्ट्रेशन
सरकार द्वारा प्रस्तावित नियम उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल पर आधारित हो सकते हैं. इस कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का भी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य किया जा सकता है, यानी की अब जो जोड़े साथ रह रहे हैं उन्हें रजिस्ट्रार के पास अपनी जानकारी दर्ज करानी होगी. इस कानून के अंतर्गत लिव-इन से जन्में बच्चों को कानूनी अधिकार मिलेंगे और महिला को भरण-पोषण का दावा करने का पूरा हक प्राप्त होगा.
एमपी में 21 प्रतिशत जनजातीय आबादी
हालांकि बताया जा रहा है कि एमपी में इसे लागू करना उतना आसान नहीं है. राज्य में करीब 21 प्रतिशत जनजातीय आबादी है, जिनकी अपनी धर्मिक परंपराएं हैं. अब सवाल यही खड़ा होता है कि क्या यूसीसी में इन्हें बाहर रखा जाएगा. वहीं इसके साथ ही लिव-इन रजिस्ट्रेशन को लेकर प्राइवेसी, सामाजिक स्वीकार्यता और कानूनी जटिलताएं भी बड़ी चुनौती बन सकती हैं. इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को बेहद संतुलित तरीके से संतुलन बनाकर ही यूसीसी कानून को लागू करना होगा.
लिव-इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेशन का मुद्दा
एमपी में सरकार यूसीसी लागू करने वाली है. ऐसे में लिव-इन रिलेशनशिप का भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो सकता है. आपसी सहमति के साथ रहने वाले सभी कपल को अब नजदीकी रजिस्ट्रार के पास जाकर रजिसट्रेशन कराना होगा.
लिव-इन रिलेशनशिप रजिस्ट्रेशन में क्या होंगे प्रावधान?
- एमपी में यदि यूसीसी का उत्तराखंड मॉडल बनाया गया तो लिव इन रिलेशनशिप में कपल को विवाह जैसे अधिकार मिल सकते हैं.
- एमपी में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले सभी जोड़ो को रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा. साथ ही उन्हें रजिस्ट्रार को जानकारी देनी होगी, ताकि यह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जा सके.
- एमपी के कपल यदि किसी दूसरे राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा हो तब भी उन्हें राज्य के रजिस्ट्रार को जानकारी देनी होगी.
- ऐसी कुछ स्थितियां होंगी जहां रजिस्ट्रेशन नहीं होगा, जैसे निषिद्ध संबंध (भाई-बहन), पहले से विवाह करने साथ रहने वाले, नाबालिग होना तथा किसी प्रकार से रिश्ता धोखे या दबाव में बना होना.
- रजिस्ट्रेशन करने वाले सभी जोड़ो का रजिस्ट्रार जांच करेगा. वहीं जरूरत पड़ने पर दोनों पक्षों को बुलाया भी जा सकता है और 30 दिनों में निर्णय लिया जाएगा.
- लिव-इन के दौरान जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और फिर उन्हें शादीशुदा दंपती के बच्चों जैसे कानूनी अधिकार मिलेंगे.
- किसी भी परिस्थिति में कपल द्वारा रिलेशनशिप खत्म करने पर रजिस्ट्रार को इसकी सूचना देनी होगी. यदि कपल की उम्र 21 साल से कम रही तो माता-पिता को भी इसकी जानकारी देनी होगी.
- लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान यदि महिला को उसका साथी छोड़ देता है तो वह कोर्ट में भरण-पोषण का दावा भी कर सकती है. उसको कानूनी संरक्षण भी मिलेगा.
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