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Bhojshala Case: धार भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद मामले में कल आ सकता है फैसला, हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी

Dhar Bhojshala Complex (File Photo)

धार भोजशाला परिसर(File Photo)

Bhojshala Case: इंदौर में धार भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद मामले को लेकर बड़ा फैसला कल आ सकता है. सुप्रीम कोर्ट के वकील और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सीनियर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि 6 अप्रैल 2026 से सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इंदौर हाई कोर्ट में इस मामले की नियमित सुनवाई चल रही थी.

हाई कोर्ट की डबल बेंच ने फैसला रखा सुरक्षित

मामले में दाखिल पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन आवेदन पर सुनवाई के बाद इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. दो दिन पहले सभी पक्षों की सुनवाई पूरी हो गई थी. इसके बाद से ही इस मामले में फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. अब माना जा रहा है कि हाई कोर्ट इस बहुचर्चित मामले में कल अपना फैसला सुना सकता है.

सभी पक्षों ने रखी अपनी-अपनी दलीलें

भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर चल रहे लंबे विवाद में अदालत के सामने सभी पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रख दी हैं. यह मामला धार्मिक मान्यताओं, ऐतिहासिक तथ्यों और कानूनी पहलुओं से जुड़ा हुआ है, जिसमें हजारों दस्तावेजों और साक्ष्यों का हवाला दिया गया. सुनवाई के दौरान हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदाय से जुड़े पक्षकारों ने अपने दावे मजबूती से रखते हुए परिसर में पूजा-अर्चना और धार्मिक अधिकारों को लेकर अलग-अलग मांगें कीं. यह विवादित स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में है.

हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष की अलग-अलग मांग

हिंदू पक्ष का कहना है कि भोजशाला मां वाग्देवी यानी देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जहां उन्हें पूजा का अधिकार मिलना चाहिए. दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद बताते हुए इसे मस्जिद के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहा है. वहीं, जैन समुदाय से जुड़े एक याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह परिसर कभी जैन मंदिर और गुरुकुल का हिस्सा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन में रखी जिस प्रतिमा को हिंदू पक्ष वाग्देवी की मूर्ति बता रहा है, वह वास्तव में जैन धर्म की यक्षिणी अंबिका की प्रतिमा है.

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