MP News: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में नगर निगम की पेयजल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. नगर निगम कार्यालय में आयुक्त, महापौर, निगम सभापति समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कक्षों में पीने के पानी के लिए बाहर से आरओ पानी की कैन मंगाई जा रही हैं, जबकि निगम परिसर में आने वाली आम जनता के लिए वाटर कूलर के माध्यम से पीने के पानी की व्यवस्था की गई है.
इस स्थिति को देखकर यह साफ प्रतीत होता है कि नगर निगम को अपने ही द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी की स्वच्छता और गुणवत्ता पर भरोसा नहीं है. यही कारण है कि अधिकारी और नेता स्वयं के लिए बाहर से आरओ का पानी मंगवाने को मजबूर हैं.
वाटर कूलर से आती है बदबू
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने आरोप लगाया कि निगम परिसर में लगे वॉटर कूलरों से आने वाले पानी में बदबू आती है और पानी गंदा रहता है. उन्होंने कहा कि यह पानी पीने योग्य नहीं है, इसलिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को मजबूरी में बाहर से आरओ पानी मंगवाना पड़ रहा है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नगर निगम द्वारा जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि न आम जनता को साफ पानी मिल पा रहा है और न ही स्वयं निगम के अधिकारी और नेता उस पानी पर भरोसा कर पा रहे हैं. यह सीधे तौर पर जनता के पैसों की बर्बादी है.
‘समय-समय पर पानी की जांच करवाई जाती है’
इस पूरे मामले पर महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि नगर निगम का निरंतर प्रयास रहता है कि आम नागरिकों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराया जाए. वहीं नगर निगम अपर आयुक्त पवन सिंह ने कहा कि नगर निगम में समय-समय पर पेयजल व्यवस्था, पानी की टंकियों और वॉटर कूलरों की जांच कराई जाती है. इस विषय को संज्ञान में लेने के बाद संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे.
नगर निगम की इस दोहरी व्यवस्था ने पेयजल की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. जब निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि ही निगम के पानी को पीने से बच रहे हैं, तो आम जनता की सेहत को लेकर चिंता स्वाभाविक है.
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