MP News: मध्य प्रदेश में मानव-वन्य जीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है. जंगलों के सिमटते दायरे और रिहायशी इलाकों तक जंगली जानवरों की बढ़ती आवाजाही के बीच हमलों के आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं. पिछले पांच वर्षों में जंगली जानवरों के हमलों की घटनाओं में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्ष 2024-25 में अब तक 71 लोगों की मौत हो चुकी है.
15 हजार 259 पालतू पशु हुए जंगली जानवरों का शिकार
वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019-20 में जंगली जानवरों के हमलों में 9,760 पालतू पशु शिकार बने थे, जिन पर 8.83 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया. यह संख्या वर्ष 2022-23 में बढ़कर 13,685 तक पहुंच गई. वर्ष 2024-25 में 15,259 पालतू पशु जंगली जानवरों के हमलों का शिकार हुए हैं, जिनके लिए 15.88 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित किया गया है. मानव जीवन पर भी खतरा बढ़ा है. वर्ष 2020-21 में 90 लोगों की मौत हुई थी, जिस पर 3.27 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया. इसके बाद 2023-24 में 76 मौतें दर्ज की गईं और 5.88 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. वहीं 2024-25 में 71 लोगों की जान जा चुकी है और 5.53 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया है.
जानवरों की वजह से ग्रामीणों में भरी दहशत
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीछे सबसे बड़ा कारण जंगलों का सिकुड़ना और वन्यजीवों का आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ना है. जंगली जानवर भोजन और पानी की तलाश में गांवों की ओर आ रहे हैं. कई मामलों में तेंदुआ, भालू और जंगली सुअर जैसे जानवरों की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है.
पीड़ितों को मुआवजा राशि देने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के आसपास तेजी से हो रहे निर्माण कार्य, अवैध अतिक्रमण और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन भी इस समस्या को बढ़ा रहा है. वन विभाग का कहना है कि राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में फेंसिंग, जागरूकता अभियान और त्वरित राहत प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है. प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा देने की व्यवस्था भी की गई है.
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