नाना पाटेकर के ये आइकॉनिक डायलॉग्स, जो मरने के बाद भी रहेंगे अमर
शिवेंद्र कुशवाहा
नाना पाटेकर
1994 में आई फिल्म क्रांतिवीर में नाना पाटेकर ने कहा था, आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने.1994 में आई फिल्म क्रांतिवीर का डायलॉग ‘कुत्ते की तरह जीने की आदत है सबको, इज्जत से जीना है तो खुद लड़ना सीखो’ आज भी लोगों को प्रेरित करता है.2007 में आई फिल्म वेलकम में सब्जी बेचते हुए उनका डायलॉग ‘सुबह से ना एक आलू बिका है, ना आधा कांदा’ लोगों को आज भी हंसाता है.1997 में आई फिल्म यशवंत में उनका दमदार डायलॉग ‘एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है’ काफी चर्चा में रहा.1996 में आई फिल्म अग्निसाक्षी में उनका इमोशनल डायलॉग ‘साला, ये दुख काहे खत्म नहीं होता बे’ लोगों के दिलों में उतर गया.1993 में आई फिल्म तिरंगा में उनका स्टाइलिश अंदाज ‘पहले लात, फिर बात, फिर मुलाकात’ दर्शकों को खूब पसंद आया.2010 में आई फिल्म राजनीति में उनका गहरा डायलॉग ‘फैसले सही या गलत नहीं होते, वक्त और हालात के हिसाब से होते हैं’ बहुत सराहा गया.2004 में आई फिल्म अब तक छप्पन में उनका दमदार डायलॉग ‘दो तरह के लोग होते हैं, एक जो ऊपर जाना चाहते हैं, दूसरे जो नीचे रहना चाहते हैं’ आज भी याद किया जाता है.