दिवाली की रात खूनी बन जाता है MP का यह लाल दरवाजा! जानें इस किले का सबसे खौफनाक राज
शिवेंद्र कुशवाहा
एमपी का सबसे रहस्यमयी किला
ऐतिहासिक इमारतों, संस्कृति और खूबसूरत झरनों से भरपूर मध्य प्रदेश सैलानियों के लिए हमेशा से ही घूमने की एक पसंदीदा जगह रहा है. चंबल नदी के पास स्थित अटेर किला अपने रहस्यमयी खजाने की कहानियों के लिए पूरे देश में फेमस है. खजाने की तलाश में स्थानीय लोगों द्वारा की गई खुदाई के कारण भदौरिया राजा बदन सिंह का बनवाया यह किला अब खंडहर हो चुका है. खजाने के अलावा यह किला अपने ‘खूनी दरवाजे’ के लिए भी बहुत चर्चा में रहता है, जिसे देखकर हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इसके पीछे किसका खून बहा था. अटेर किले का 400 साल पुराना लाल दरवाजा इतिहास के सबसे डरावने और रहस्यमयी दरवाजों में से एक माना जाता है. इसके अंदर छिपे भयानक रहस्यों और खौफनाक इतिहास की वजह से ही इसे ‘खूनी दरवाजा’ कहा जाता है. दिवाली की कार्तिक अमावस्या की रात यह लाल दरवाजा पूरी तरह से बदलकर सचमुच एक खौफनाक ‘खूनी दरवाजे’ जैसा दिखाई देने लगता है.कहा जाता है कि यह दुर्ग भदावर राजाओं के इतिहास की गवाही देता है, जहां लाल दरवाजे के ऊपर कटे हुए भेड़ के सिर से नीचे रखे बर्तन में खून टपकता रहता था. दुश्मनों की गुप्त खबर लाने वाले जासूस इसी बर्तन के खून से अपने माथे पर तिलक लगाकर राजा के सामने हाजिर होते थे.