एमपी का यह गांव कहलाता है ‘सरकारी नौकरी की फैक्ट्री’, यहां से निकले कई जज, कुलपति और सांसद
शिवेंद्र कुशवाहा
इस गांव में हैं सबसे ज्यादा सरकारी नौकरी वाले लोग
एमपी के इस गांव में महानगरों की तरह हवाई पट्टी है और यहां पर मराठा रेजीमेंट भी मौजूद है.बुंदेलखंड के सागर जिले में स्थित एक छोटा सा गांव ढाना है, जिसे सरकारी नौकरी का फैक्ट्री कहा जाता है.इस जगह ने छोटे सिपाही से लेकर ADGP जैसे बड़े पुलिस अधिकारी और माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice-Chancellor) तक दिए हैं. ढाना गांव के लगभग 80 प्रतिशत घरों से लोग डॉक्टर, जज, इंजीनियर, वैज्ञानिक और सेना जैसे बड़े सरकारी पदों पर सेवा दे रहे हैं.यहां के बाकी बचे लोग भी खाली नहीं हैं. वे या तो अपनी बेहतरीन खेती संभाल रहे हैं या प्राइवेट सेक्टर में अच्छी नौकरियों में हैं.ढाना गांव 10,000 की आबादी में से 1,500 से ज़्यादा लोग सरकारी नौकरियों में हैं, जिनमें पूर्व डीआईजी एम.के. पटेरिया और पूर्व सांसद नर्मदा प्रसाद राय जैसी बड़ी हस्तियां शामिल हैं. यहां के युवाओं में उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) के प्रति गहरी जागरूकता ही इस गांव की बड़ी सफलता की मुख्य वजह है. गांव के शिक्षक प्रभात चौरसिया के 14 सदस्यों वाले परिवार में उनकी मां और चाची को छोड़कर पत्नी, भाई, चाचा और भाभी सहित कुल 9 लोग सरकारी शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं.