Ashadh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है. इसे आषाढ़ी अमावस्या या पितृ अमावस्या भी कहा जाता है. इस साल 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी. मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है और जीवन की कई परेशानियों से राहत मिलती है.
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
अमावस्या के दिन सुबह का समय स्नान, तर्पण और दान के लिए सबसे शुभ माना गया है.
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 5:32 बजे से 8:45 बजे तक.
कुतुप काल: दोपहर 11:40 बजे से 12:35 बजे तक.
ऐसे करें पितरों का पूजन और तर्पण
- सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें.
- यदि नदी जाना संभव न हो, तो घर के नहाने के पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और शुभ कार्यों का संकल्प लें.
- स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और लाल फूल डालें.
- फिर ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें.
- एक तांबे या कांसे के पात्र में जल लें. उसमें थोड़ा कच्चा दूध, जौ, काले तिल और कुश डालें.
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का स्मरण करें और अंगूठे की ओर से जल अर्पित करें.
- घर में सात्विक भोजन बनाएं. भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं और चींटियों के लिए थोड़ा-थोड़ा भोजन अलग निकालें.
- मान्यता है कि इससे पितर प्रसन्न होते हैं.
पितृ दोष से मुक्ति के लिए शाम को करें ये उपाय
पीपल के पेड़ पर दीपक जलाएं
आषाढ़ अमावस्या की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें. धार्मिक मान्यता है कि इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
दक्षिण दिशा में दीपक रखें
शाम के समय घर के मुख्य द्वार या दक्षिण दिशा में तिल या सरसों के तेल का एक दीपक पितरों के नाम से जलाएं. मान्यता है कि इससे पितर प्रसन्न होकर परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.
