दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा सुख-समृद्धि और बुद्धि की कामना के लिए की जाती है. मान्यता है कि मां लक्ष्मी धन-वैभव और गणेशजी विवेक के प्रतीक है. इसलिए पूजन के लिए मूर्तियां खरीदते समय कुछ पारंपरिक मान्यताओं का ध्यान रखा जाता है.
अलग-अलग हों मूर्तियां
मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी और गणेशजी की अलग-अलग मूर्तियां खरीदनी चाहिए, गणेशजी की प्रतिमा में उनका वाहन मूषक होना शुभ माना जाता है. वहीं, मां लक्ष्मी की मूर्ति कमल पर विराजमान और आशीवांद देती मुद्रा में होनी चाहिए.
मुद्रा और स्वरूप का रखें ध्यान
परंपरागत मान्यता के अनुसार, गणेशजी की बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति घर के पूजन के लिए पसंद की जाती है. मां लक्ष्मी की बैठी हुई मुद्रा वाली प्रतिमा को शुभ माना जाता है. हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं, अनिवार्य नियम नहीं.
मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता
दीपावली पर मिट्टी से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का पूजन पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है. पर्यावरण के लिहाज से भी प्राकृतिक मिट्टी से बनी और आसानी से विसर्जित होने वाली मूर्तियां बेहतर विकल्प है.
पुरानी मूर्तियों का क्या करें?
हर साल नई मूर्तियां खरीदना कुछ परिवारों की घरंपरा है, लेकिन इसे अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाना चाहिए. चांदी या अन्य धातु की मूर्तियों को साफ करके दोबारा पूजन किया जा सकता है. पुरानी मिट्टी की मूर्तियों का निपटान स्थानीय परंपरा और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए करें.
