Murti Sthapana Shubh Muhurat Details: हिंदू धर्म में हर त्योहार का विशेष महत्व है. साल में कुल 12 महीने होते हैं और इन सभी महीनों में कोई न कोई त्योहार आता है. इन सभी त्योहारों का अपना-अपना अलग महत्व होता है. ऐसे में अब अगले महीने सितंबर में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाएगा. देशभर में गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. भक्त भगवान गणेश की मर्ति स्थापित करते हैं और मूर्ति विसर्जन तक शिव-पुत्र गणेश का उपवास भी रखते हैं.
हिंदू पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी का यह पावन पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी खास दिन को भगवान गणेश का जन्म हुआ था. इसलिए हर साल इस त्योहार को गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और यह उत्सव लगभग 10 दिनों तक चलता है. ऐसे में आइए जानते हैं इस साल गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी और इसकी पूजा-विधि और महत्व के बारे में.
इस साल गणेश चतुर्थी कब है?
हिंदू धर्म को मानने वाले लोग गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़े ही उत्साह, खुशी और धूमधाम से मनाते हैं. उत्तर भारत से लेकर दक्षिण, पूर्व और पश्चिमी इलाकों के कोने-कोने मे भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चतुर्थ तिथि की शुरुआत 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर होगी और 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर खत्म होगी. मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय हुआ था. ऐसे में इस साल गणेश चतुर्थी का त्योहार 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा.
भगवान गणेश की स्थापना कैसे करें?
- सबसे पहले जिस स्थान पर आप गणेश जी की स्थापना करना चाहते हैं, उस स्थान की अच्छे से सफाई कर लें.
- इसके बाद उस स्थान पर साफ और नया लाल कपड़ा बिछाएं.
- इसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर उनका ध्यान करें और उन्हें पूजा-सामग्री अर्पित करें.
- फिर गणेश जी की मूर्ति को सिंदूर से तिलक लगाएं और दूर्वा अर्पित करें.
- अब फूल और अक्षत चढ़ाएं. इस प्रक्रिया के बाद भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें.
- अंतिम में भगवान गणेश की आरती गाकर पूजा करें और भगवान गणेश को भोग लगाएं.
- मोदक का भोग भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग है, इसलिए इसे चढ़ाना बिल्कुल न भूलें.
गणेश चतुर्थी के दिन इन बातों का ध्यान रखें
शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि के दिन चंद्रमा के दर्न नहीं करने चाहिए. हिंदू धर्म ग्रंथों में इस दिन चंद्रमा के दर्शन को अशुभ बताया गया है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन यदि कोई भी व्यक्ति चंद्रमा के दर्शन कर लेता है, तो उस पर झूठा कलंक लग जाता है.
गणेश मूर्ति को दूर्वा क्यों अर्पित की जाती है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, दूर्वा भगवान गणेश को सबसे अधिक प्रिय है. इसलिए इसे चढ़ाने का एक विशेष महत्व है. पूजा के दौरान दूर्वा की छोटी-से-छोटी गांठें बनाकर भगवान को अर्पित करें. इसके लिए सबसे पहले दूर्वा को एक साथ लें और उसमें कलावा बांध लें, इसके बाद गणेश जी की मूर्ति पर दूर्वा चढ़ाएं.
