Anant Chaturdashi Puja Vidhi: हर साल की तरह इस साल भी देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार गणेश चतुर्थी का पवन पर्व 10 दिनों का नहीं बल्कि 12 दिनों का रहा. ऐसे में आज गणेश चतुर्थी का अंतिम दिन यानी अनंत चतुर्दशी का दिन है. पूरे 12 दिनों तक भक्तों ने गणपति बप्पा की बड़े ही श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना कर उनकी उपासना की. अब आज अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की मूर्ति का विसर्न किया जाना है. मान्यताओं के अनुसार, अगर शुभ मुहूर्त में गणेश जी का विसर्जन किया जाता है, तो इससे गणपति बप्पा की कृपा प्राप्त होगी और घर पर सुख-शांति बनी रहेगी. ऐसे में आइए जानते हैं गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त के बारे में.
मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करना और उन्हें रक्षासूत्र बांधनाशुभ माना जाता है. इस खास दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है. पुरुषों के दाहिने हाथ में और महिलाओं के बाएं हाथ में 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है.
गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त 2026
- प्रातःकाल (चर, लाभ, अमृत):- सुबह 06:11 बजे से सुबह 10:42 बजे तक
- अपराह्न (शुभ):- दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक
- अपराह्न (चर):- शाम 4:45 बजे से शाम 6:15 बजे तक
- रात्रि (लाभ):- रात 9:14 बजे से रात 10:44 बजे तक
अनंत चतुर्दशी 2026 तिथि
- चतर्दशी तिथि प्रारंभ:- 24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त:- 25 सितंबर 2026 को रात 11:06 बजे
- व्रत की तिथि:- अनंत चतुर्दशी व्रत 25 सितंबर 2026 को रखा जाएगा.
गणेश विसर्जन विधि
- गणेश विसर्जन से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और बप्पा की षोडशोपचार या विधिपूर्वक पूजा करें.
- गणेश जी की मूर्ति को सिंदूर, अक्षत, दूर्वा, फूल-माला और मोदक का भोग लगाएं.
- इसके बाद कपूर जलाकर गणति बप्पा की आरती करें और यदि अनजाने में कोई गलती हो गई हो, तो क्षमा मांगें.
- मूर्ति विसर्जन से पहले एक लाल या पीले रंग के कपड़े में थोड़े चावल (अक्षत), पंचमेवा, मोदक, सुपारी और दक्षिणा रखकर एक छोटी पोटली बनाएं.
- इसके बाद, “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयकारा लगाते हुए गणेश मूर्ति उठाएं.
- बड़े ही सम्मान के साथ मूर्ति को लेकर आगे बढ़ें और किसी पवित्र नदी या तालाब में श्रद्धापूर्वक विसर्जित करें.
- विसर्जन करने से पहले एक बार फिर कपूर की आरती करना न भूलें.
