Rath Yatra Schedule Change: ओडिशा में स्थित जगन्नाथ मंदिर हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर साल आषाढ़ के महीने में जगन्नाथ मंदिर की मशहूर रथ यात्रा निकाली जाती है. इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलते हैं. इस खास मौके पर देश भर से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु रथ यात्रा में भाग लेते हैं. हर साल आमतौर पर जून महीने में निकलने वाली जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा इस बार थोड़ा आगे बढ़ गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल रथ यात्रा कब से शुरू हो रही है.
इस साल कब शुरू होगी जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा?
- बता दें कि इस साल जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा जून महीने में शुरू न होकर, बल्कि 16 जुलाई 2026 दिन गुरुवार से शुरू होगी.
- आमतौर पर हर साल इस विशेष यात्रा को जून के महीने में निकाला जाता था, लेकिन इस बार इसे एक महीने बाद निकाला जाएगा. तारीख को आगे बढ़ाने की एक खास वजह है.
जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा की तारीख क्यों आगे बढ़ी?
पुरी की यह प्रसिद्ध रथ यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को शुरू होती है. इस बार ज्येष्ठ का महीना अधिकमास होने के कारण आषाढ़ का महीना एक महीना आगे बढ़ गया है. यही कारण है कि जो रथ यात्रा आमतौर पर जून में शुरू होती थी, वह इस साल आगे बढ़कर जुलाई के महीने में शुरू होगी.
रथ यात्रा की तैयारियां और मुख्य रस्में
रथ यात्रा के लिए रथों को बनाने का काम और दूसरी तैयारियां अक्षय तृतीया के पावन दिन से ही शुरू हो जाती हैं. जैसे-जैसे रथ यात्रा के दिन पास आते हैं, मंदिर के कई दूसरे धार्मिक अनुष्ठान और रस्में भी शुरू हो जाती हैं. इनमें ‘स्नान पूर्णिमा’ सबसे प्रमुख है. इस दिन भगवान जगन्नाथ को कई कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है, जिसके बाद परंपरा के अनुसार भगवान बीमार पड़ जाते हैं. आइए जानते हैं इस साल की रथ यात्रा का पूरा शेड्यूल.
- 29 जून 2026 (स्नान पूर्णिमा): इस दिन भगवान की स्नान यात्रा निकाली जाएगी, जिसके बाद भगवान एकांतवास में चले जाएंगे (बीमार हो जाएंगे).
- 14 जुलाई 2026 (नवयौवन दर्शन): पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भगवान भक्तों को दर्शन देंगे.
- 16 जुलाई 2026 (मुख्य दिन – रथ यात्रा): भव्य रथ यात्रा की शुरुआत होगी. भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर के लिए रवाना होंगे.
- इसके बाद भगवान अगले 8 दिनों तक अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) में रहेंगे, जहां उनकी खूब सेवा की जाती है.
- 24 जुलाई 2026 (बहुड़ा यात्रा): भगवान की मुख्य मंदिर में वापसी होगी (उलटी रथ यात्रा).
- 25 जुलाई 2026 (सुना बेश): इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी का सोने के भारी आभूषणों से भव्य और दिव्य श्रृंगार किया जाएगा.
रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
पुरी की रथ यात्रा को बहुत पवित्र और चमत्कारी माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त इस भव्य रथ यात्रा के दर्शन करता है, उसके जीवन के सभी पाप और कष्ट मिट जाते हैं. इसके साथ ही जो श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक भगवान के रथ की रस्सी को केवल छू लेता है या उसे खींचने का सौभाग्य पाता है, उसे मोक्ष मिल जाती है और वह जीवन-मरण के बंधन से हमेशा के लिए आजाद हो जाता है.
