भारतीय संस्कृति में करवा चौथ का व्रत पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और आपसी प्रेम का प्रतीक माना जाता है. इस दिन सुहागिनें सोलह श्रृंगार कर पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और रात में चांद को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूरा करती हैं. समय के साथ अब अविवाहित युवतियां भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखने लगी हैं.
लेकिन अक्सर महिलाओं के मन में एक असमंजस रहता है कि यदि करवा चौथ के दिन पीरियड्स (मासिक धर्म) आ जाएं, तो क्या इस व्रत को रखना चाहिए या नहीं? आइए विस्तार से जानते हैं इस विषय पर क्या कहते हैं धार्मिक और स्वास्थ्य से जुड़े नियम.
क्या पीरियड्स में रख सकते हैं करवा चौथ का व्रत?
विशेषज्ञों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि करवा चौथ के दिन मासिक धर्म चल रहा है, तो भी आप यह व्रत रख सकती हैं. इसके लिए आपको व्रत छोड़ने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, इस दौरान शरीर में कमजोरी या थकान महसूस हो सकती है, इसलिए अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें.
करवा चौथ 2026: शुभ तिथि और समय
दृक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 29 अक्टूबर 2026 को रात 1 बजकर 6 मिनट पर होगी और इसका समापन उसी दिन रात 10 बजकर 9 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर करवा चौथ का यह पावन व्रत 29 अक्टूबर को ही मान्य होगा.
पीरियड्स के दौरान इन नियमों का रखें विशेष ध्यान:
कथा और स्मरण: आप अपनी श्रद्धा के अनुसार बैठकर करवा चौथ की कथा सुन सकती हैं. इसके साथ ही मन ही मन भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता का स्मरण कर सकती हैं. पूजा में शामिल होने को लेकर अपने परिवार की पारिवारिक परंपराओं का पालन करें.
भोजन और भोग तैयार करना: मासिक धर्म के दौरान भोजन या पूजा का भोग बनाने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं. यदि आपके घर में इस दौरान रसोई या पूजा का भोग बनाने की मनाही है, तो आप घर के किसी अन्य सदस्य की सहायता ले सकती हैं और भोग किसी दूसरी महिला से लगवा सकती हैं.
चांद की पूजा और अर्घ्य: यदि आप इस स्थिति में व्रत रख रही हैं, तो आप चांद को पानी (अर्घ्य) दे सकती हैं. हालांकि, इस दौरान सीधे दीप जलाने से बचें और चंद्रमा का मानसिक स्मरण करें. आप चाहें तो घर की किसी अन्य महिला से दीप जलवाकर पूजा संपन्न करवा सकती हैं. पूजा के अंत में अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगकर अपना व्रत खोल सकती हैं.
स्वास्थ्य का रखें ख्याल: यदि व्रत के दौरान कमजोरी या अत्यधिक थकान महसूस हो, तो खुद पर जोर न डालें. शरीर को पूरा आराम दें, क्योंकि धर्म से पहले स्वास्थ्य सर्वोपरि है.
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