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Mangalika Dosha: क्या आपकी कुंडली में मांगलिक दोष है? जानिए इसके अशुभ प्रभाव कब शुरू होते हैं

Mangalika Dosha

मांगलिक दोष

Mangalika Dosha: अक्सर लोग मंगलिक दोष या शनि की साढ़ेसाती के नाम से डरने लगते हैं, पर ज्योतिष की ये दोनों स्थितियां हमेशा कष्टकारी नहीं होतीं. इनका प्रभाव पूरी तरह से आपकी राशि और लग्न पर निर्भर करता है. मंगल जैसा साहसी और शक्तिशाली ग्रह किसी का बुरा कैसे कर सकता है? असल में यह ग्रह व्यक्ति को निडर और ऊर्जावान बनाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि ज्योतिष में ‘मंगली’ होना किसे कहते हैं.

व्यक्ति कब मंगली होता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब मंगल ग्रह कुंडली के प्रथम लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में विराजमान होता है, तो वह व्यक्ति के स्वभाव और वैवाहिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है. इसे ही मंगली दोष या मांगलिक योग कहा जाता है, जो व्यक्ति में ऊर्जा, साहस का संकेत देता है.

चंद्र मंगली कब माना जाता है?

वहीं ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि यदि आपकी कुंडली में मंगल चंद्रमा के साथ बैठा है, तो इसको चंद्र मंगली मान लिया जाता है. हमेशा चंद्र कुंडली चंद्रमा को लग्न में बैठाकर बनाई जाती है. इसके अलावा, यदि मंगल गृह चंद्रमा के साथ होगा तो वो भी लग्न में आ जाएगा, जिसे चंद्र मंगली या आंशिक मंगली कहा जाता है.

मंगल सुनते ही लोग क्यों डर जाते हैं?

ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह की तीन दृष्टियां बताई गई हैं. इनमें से चौथी, सातवीं और आठवीं दृष्टि हैं. वहीं जब ये दृष्टियां मांगलिक होती हैं, तो आपके पारिवारिक जीवन के साथ-साथ वैवाहिक जीवन को भी प्रभावित करती हैं. इसलिए जैसे ही लोग यह सुनते हैं की वो मांगलिक हैं, वैसे ही उनके मन में डर बैठ जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मांगलिक होने पर अगर आपका मंगल राशि लग्न के अनुसार, कारक बनकर आपकी कुंडली में बैठा है, तो मंगली होने पर आपके जीवन में कोई परेशानी नहीं आएगी, बल्कि यह आपको लाभ पहुंचाएगा.

क्या प्रभाव देगा मंगल योग?

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मांगलिक व्यक्ति के जीवन में परेशानी क्यों आती है?

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