Phulera Dooj: हिंदू धर्म में फरवरी और फाल्गुन का महीना त्योहारों के हिसाब से बहुत पवित्र माना जाता है. आज यानी 19 फरवरी को फुलेरा दूज का खास पर्व है, जो हर साल फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को आता है. इस दिन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे साल का ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन कोई भी शुभ या मांगलिक काम करने के लिए आपको पंडित जी से मुहूर्त पूछने या पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती. मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों का बहुत शुभ फल मिलता है. चलिए जानते हैं कि इस साल फुलेरा दूज पर पूजा का सही समय और आसान तरीका क्या है.
फुलेरा दूज का शुभ मुहूर्त कब है?
पंचांग के मुताबिक, द्वितीया तिथि 18 फरवरी की शाम 4:57 बजे शुरू होकर 19 फरवरी को दोपहर 3:58 बजे तक रहेगी. वैसे तो यह पूरा दिन ही शुभ है और आप कभी भी पूजा कर सकते हैं, लेकिन दोपहर 12:17 से 1:03 तक ‘अभिजीत मुहूर्त’ और दोपहर 1:00 से 2:33 तक ‘अमृत काल’ का समय पूजा या किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए सबसे उत्तम है. फुलेरा दूज खुद में एक सिद्ध मुहूर्त है, इसलिए समय की पाबंदी के बिना भी आप श्रद्धापूर्वक शुभ कार्य संपन्न कर सकते हैं.
फुलेरा दूज की पूजन सामग्री
पूजा के लिए आपको कुछ जरूरी चीजें पहले से जुटा लेनी चाहिए. जैसे राधा-कृष्ण की मूर्ति या फोटो और उनके श्रृंगार के लिए चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और सिंदूर साथ ही सजावट के लिए गुलाब, गेंदा और सफेद फूल रखें. भोग के लिए माखन-मिश्री व ताजे फल और पूजन के लिए घी का दीपक, अगरबत्ती, कपूर, गंगाजल, चंदन, अक्षत और गुलाल तैयार रखें.
फुलेरा दूज की पूजा विधि
फुलेरा दूज की पूजा के लिए सुबह जल्दी नहाकर साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें. सबसे पहले पूजा की जगह को साफ करें फिर राधा-कृष्ण की मूर्ति को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं. कान्हा जी को पीले कपड़े और राधा जी को सुंदर वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार करें. इस दिन फूलों की होली का रिवाज है इसलिए उन्हें ढेर सारे फूल और मोरपंख अर्पित करें.
इसके बाद चंदन का तिलक लगाकर घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं. भगवान के मंत्रों का जाप करें और अंत में उन्हें माखन-मिश्री के साथ सात्विक भोजन का भोग लगाएं.
फुलेरा दूज पर कौन-कौन से कार्य कर सकते हैं?
फुलेरा दूज का दिन शादी-ब्याह, नए घर में प्रवेश या जमीन पूजन जैसे बड़े कामों के लिए बहुत ही शुभ होता है. अगर आप नया बिजनेस या नई नौकरी शुरू करना चाहते हैं, तो यह दिन उसके लिए भी बेहतरीन है. इसके साथ ही किसी भी तरह के धार्मिक कार्य या अनुष्ठान करने के लिए भी इस तिथि को सबसे उत्तम माना जाता है.
