Holi 2026: होली का त्योहार हर साल फाल्गुन महीने में आता है. रंगों के इस त्योहार में लोग एक-दूसरे को अबीर और गुलाल लगाते हैं. अक्सर लोग बाजार से खुशबूदार गुलाल खरीदते हैं ताकि त्योहार सुगंधित हो उठे. लेकिन राजस्थान में एक ऐसा स्थान है जहां लोग रंगों से नहीं बल्कि चिता की राख से होली खेलते हैं. जहां आम इंसान श्मशान घाट जाने के नाम से ही कांप जाता है, वहीं इस गांव के लोग होली की आधी रात को श्मशान पहुंचते हैं. यह परंपरा यहां सदियों से चली आ रही है. ऐसे में आइए जानते हैं इस अनोखी परंपरा और उस स्थान के बारे में जहां राख से होली खेली जाती है.
चिता की राख से होली कहां खेली जाती है?
राजस्थान अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है. राज्य के अधिकांश हिस्सों में लोग रंग और गुलाल से होली मनाते हैं, लेकिन भीलवाड़ा एक ऐसा स्थान है जहां चिता की राख से होली खेली जाती है. पिछले 16 वर्षों से भीलवाड़ा के मसानिया भैरव नाथ मंदिर में यह अनूठी परंपरा निभाई जा रही है.
आधी रात को लोग भैरव नाथ की शोभायात्रा निकालते हैं
होली के अवसर पर यहां के लोग आधी रात को ढोल-नगाड़ों के साथ श्मशान से भैरव नाथ की शोभायात्रा निकालते हैं. इस यात्रा में दूर-दूर से लोग एकत्रित होते हैं और चिता की भस्म को गुलाल की तरह हवा में उड़ाकर भगवान भैरव नाथ के साथ होली खेलते हैं. स्थानीय लोगों की यह अनूठी परंपरा उनकी गहरी श्रद्धा और अटूट विश्वास को दर्शाती है.
कितने सालों से चिता की राख से होली खेली जा रही है?
पंचमुखी मोक्षधाम स्थित मसानिया भैरव नाथ मंदिर के पुजारी रवि कुमार ने बताया कि पिछले 16 वर्षों से यहां श्मशान होली की यह परंपरा निभाई जा रही है. अपनी अटूट श्रद्धा के साथ यहां लाखों लोग आधी रात को श्मशान घाट पर एकत्रित होकर भैरव नाथ के साथ होली खेलते हैं.
कहां-कहां चिता की राख से होली खेली जाती है?
वहीं बनारस के मणिकर्णिका घाट और काशी विश्वनाथ की नगरी में भी चिता की राख से होली खेलने की प्राचीन परंपरा है. उन्हीं की तर्ज पर पंचमुखी धाम में भी श्रद्धालु चिता की भस्म से होली खेलते हैं. होलिका दहन की रात 11 बजे बाबा भैरवनाथ की पालकी निकाली जाती है, जो रात 12 बजे तक गाजे-बाजे के साथ श्मशान घाट पहुंचती है. इस पालकी यात्रा में दूर-दूर से हर आयु वर्ग के लोग बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल होते हैं और पूरे उत्साह व श्रद्धाभाव के साथ चिता की राख से होली खेलते हैं.
भैरव नाथ मंदिर आने वाले भक्तों का क्या कहना है?
मसानियां भैरव नाथ मंदिर आने वाले भक्तों का कहना है कि वे हर साल अपने पूरे परिवार के साथ यहां चिता की राख से होली खेलने आते हैं. श्रद्धालुओं के अनुसार, वे कई वर्षों से इस परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं और बाबा भैरवनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. वे साल भर इस खास होली का बेसब्री से इंतजार करते हैं और अब कुछ ही दिनों में बाबा के साथ होली खेलने के अवसर को लेकर बेहद उत्साहित हैं.
