सावधान! दिल्ली मेट्रो में सामान बेचने या चंदा मांगने पर अब 5000 रुपए तक जुर्माना, जानिए क्या है नया नियम
दिल्ली मेट्रो
Delhi Metro New Rules: संसद से जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 पास होने के बाद अब दिल्ली मेट्रो में बिना इजाजत सामान बेचना भारी पड़ेगा. नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति मेट्रो परिसर या ट्रेन के अंदर बिना अनुमति के कुछ भी बेचता है या सामान बेचने की कोशिश करता है, तो उसे 5,000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. सरकार ने अवैध तरीके से सामान बेचने वालों पर लगाम लगाने के लिए जुर्माने की इस राशि को पहले के मुकाबले काफी बढ़ा दिया है.
5 हजार रुपए तक लगेगा जुर्माना
यह बदलाव मेट्रो रेलवे एक्ट 2002 की धारा 73 में संशोधन करके किया गया है. पहले मेट्रो में बिना इजाजत सामान बेचने पर बहुत कम जुर्माना लगता था. सिर्फ 100 से 400 रुपये तक. साल 2019 में भी इसकी अधिकतम सीमा 400 रुपये ही थी, जिसे अब सीधे बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है. सरकार ने जुर्माने में यह भारी बढ़ोतरी इसलिए की है ताकि लोग नियमों को गंभीरता से लें और मेट्रो परिसर में अवैध बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके.
नए नियम को लेकर सरकार का क्या कहना है?
केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था. इसका असली मकसद छोटे-मोटे अपराधों को ‘क्रिमिनल केस’ की जगह ‘सिविल पेनल्टी’ यानी जुर्माने में बदलना है. सरकार का मानना है कि ऐसा करने से अदालतों में मुकदमों की भीड़ कम होगी और छोटे विवादों का निपटारा कोर्ट-कचहरी के चक्कर के बिना जल्दी हो सकेगा.
शिकायतों से मिलेगी राहत
मेट्रो परिसरों में बिना अनुमति के सामान बेचने, भीख मांगने, चंदा जुटाने या धार्मिक पर्चे बांटने जैसी शिकायतें अक्सर मिलती रही हैं. उदाहरण के लिए दिसंबर 2025 में एक यात्री ने कोच के अंदर चंदा मांगने और धार्मिक सामग्री बांटने की शिकायत की थी. इस तरह की गतिविधियों से न केवल यात्रियों को परेशानी होती है, बल्कि मेट्रो की सुरक्षा और सुविधा पर भी बुरा असर पड़ता है.
नए नियम लागू होने से क्या फायदे होंगे?
सरकार का मानना है कि इन नए कड़े नियमों से मेट्रो परिसरों में अनुशासन और व्यवस्था और बेहतर होगी. भारी जुर्माना लगाने का मुख्य उद्देश्य बिना अनुमति के होने वाली गतिविधियों पर लगाम लगाना है, ताकि यात्रियों का सफर पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके.