Artificial Intelligence: बदलते समय के साथ पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी का दौर देखने को मिल रहा है. आज के इस आधुनिक युग में AI जिसे हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहते हैं, इंसान के जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है. पढ़ाई-लिखाई और ऑफिस वर्क से लेकर रोजमर्रा के सारे काम आज AI कर रहा है. बस कुछ ही सेकंडों में बड़े से बड़े और मुश्किल से मुश्किल कामों को चंद मिनटों में पूरा कर देना AI के लिए कोई चुनौती नहीं है. हर उस सवाल का जवाब आज AI के पास है, जो शायद किसी आम इंसान के पास न हो.
AI को और ज्यादा मजबूत बनाने के लिए हाल ही में भारत ने 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक AI समिट का आयोजन कराया, जहां इस वैश्विक मंच पर दुनिया के 100 से अधिक देशों की टेक कंपनियां शामिल हुईं और अपने नए AI प्रोडक्ट्स को पेश किया. ऐसे में अब सवाल यह है कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ शब्द का पहली बार उपयोग कब किया गया और यह नाम किसने दिया.
कब और किसने सुझाया था AI का नाम?
कॉलेज प्रोजेक्ट और ऑफिस की रिपोर्ट के लिए ChatGPT, Google Gemini जैसे AI टूल का उपयोग किया जाता है. ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) शब्द का प्रयोग पहली बार लगभग 70 साल पहले किया गया था. अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक जॉन मैकार्थी ने 1956 में यह शब्द सुझाया. मैकार्थी एक ऐसी मशीन बनाना चाहते थे जो मानवों की तरह सोच सके. 1956 में उन्होंने अमेरिका के डार्टमाउथ कॉलेज में वैज्ञानिकों की एक बैठक बुलाई. इस बैठक के दस्तावेजों में पहली बार ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ नाम का औपचारिक उपयोग किया गया था.
क्यों चुना गया ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ नाम?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम ऐसे ही नहीं रखा गया था, बल्कि इसके पीछे शोधकर्ताओं का गहरा विचार-विमर्श था. जॉन मैकार्थी और उनके साथियों ने एक विशेष बैठक में इस पर चर्चा की थी. वैज्ञानिकों का मानना था कि यदि मशीनें कुछ सीख सकती हैं, तर्क कर सकती हैं और समस्याओं का समाधान निकाल सकती हैं, तो यह उनकी बुद्धिमत्ता ही है. इसी सोच के आधार पर ‘आर्टिफिशियल’ (कृत्रिम) और ‘इंटेलिजेंस’ (बुद्धि) शब्दों को जोड़कर यह नाम दिया गया.
उस समय कंप्यूटर अपने शुरुआती दौर में थे, फिर भी उन वैज्ञानिकों ने भविष्य को भांप लिया था. उन्होंने कल्पना की थी कि एक ऐसा दौर आएगा जब मशीनें इंसानों की तरह काम करेंगी, खेलेंगी, बोलेंगी और हमारी भाषा समझ सकेंगी. वैज्ञानिकों की वही दूरदर्शी सोच आज सच साबित हो रही है.
किसने रखी AI रिसर्च की नीव?
- डार्टमाउथ सम्मेलन में मार्विन मिन्स्की और क्लाउड शैनन जैसे कई दिग्गज वैज्ञानिक जुटे थे.
- इन सभी दिग्गजों ने मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शुरुआत की थी.
- उस समय उन्हें भी अंदाज़ा नहीं था कि यह छोटा सा शब्द एक दिन पूरी दुनिया की तकनीक को बदल देगा.
- यहीं से AI रिसर्च की असली बुनियाद रखी गई थी.
आज AI शब्द का क्या असर हुआ?
1956 के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने वैज्ञानिकों के बीच अपनी पहचान बनानी शुरू की. हालांकि शुरुआत में रिसर्च की रफ्तार धीमी थी, लेकिन 1980 के दशक में कंप्यूटर की ताकत बढ़ने से इस पर काम बहुत तेज हो गया. आज वही छोटा सा विचार एक बड़े बदलाव का रूप ले चुका है, जिसका इस्तेमाल हम रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों में देख रहे हैं.
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आज के दौर में AI का क्या रोल है?
आज के समय को AI का युग कहना बिल्कुल सही है क्योंकि यह हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. अस्पतालों में सटीक इलाज और बैंकों में धोखाधड़ी रोकने से लेकर, चैटबॉट और खुद चलने वाली कारों तक सब इसी तकनीक का कमाल है. मोबाइल हो या कोर्ट-कचहरी आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहा है. इसलिए यह जीयन के हर पहुलुओं को समझने में भी काम कर रहा है.
