Vistaar NEWS

चोरों की निगरानी के लिए नहीं, बल्कि इस वजह से CCTV हुआ था अविष्कार, जानिए इसके पीछे का इतिहास

cctv

cctv कैमरा

Origin Of CCTV Cameras: आज के समय में ऑफिस, स्कूल, कॉलेज से लेकर घरों और दुकानों तक हर जगह CCTV कैमरे लगे होते हैं. चोर, डकैतों, गुंडों और मावलियों से बचने के लिए अक्सर लोग CCTV का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी अनुपस्थिति में भी सच्चाई का पता चल सके. घर के अंदर हो या बाहर हर जगह CCTV लगे हुए नजर आते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर CCTV का सबसे पहले किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया था. अगर आप सोच रहे हैं कि इसका आविष्कार चोरों और डकैतों की निगरानी के लिए किया गया था, तो आप गलत हैं. आइए हम आपको बताते हैं कि CCTV का इस्तेमाल कब और किस काम के लिए किया गया था.

CCTV का आविष्कार किसने किया?

आपको बता दें कि दुनिया में पहली बार CCTV जर्मनी के ‘पीनेमुंडे’ (Peenemünde) सैन्य अड्डे पर लगाया गया था. इस तकनीक को किसी मामूली इंसान ने नहीं बल्कि दुनिया के मशहूर जर्मन इंजीनियर वॉल्टर ब्रुश (Walter Bruch) ने तैयार किया था. उनके इस अविश्वसनीय आविष्कार के कारण आज CCTV इंसानों के लिए एक वरदान बन गया है.

CCTV का आविष्कार क्यों किया गया था?

अब आइए जानते हैं कि CCTV का आविष्कार क्यों किया गया और इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी. दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने V-2 रॉकेट तैयार किया था और वह इसका सफलतापूर्वक परीक्षण कर इसे लॉन्च करने वाला था. लेकिन रॉकेट की टेस्टिंग के दौरान अक्सर कोई न कोई तकनीकी खराबी आ जाती थी, जिससे भयानक विस्फोट होने का खतरा हमेशा बना रहता था. इसलिए वैज्ञानिकों ने सोचा कि एक ऐसी तकनीक का आविष्कार किया जाए जिसके जरिए दूर बैठकर ही रॉकेट लॉन्च की निगरानी की जा सके और किसी भी तरह के हादसे से बचा जा सके.

‘ब्लास्ट ज़ोन’ के पास CCTV सेट किया गया

इसी ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने CCTV जैसी खास तकनीक विकसित की. इस सिस्टम की सफलता का सबसे बड़ा कारण कैमरों को सही और सुरक्षित स्थान पर स्थापित करना था. इंजीनियर वॉल्टर ब्रच (Walter Bruch) ने अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करते हुए कैमरों को लॉन्च पैड के ‘ब्लास्ट ज़ोन’ के पास एक मज़बूत स्टील केसिंग में अच्छी तरह फिट कर दिया.

कैमरे को बंकर से जोड़ा गया था

इन कैमरों को बहुत ही सुरक्षित स्थानों पर लगाया गया था, ताकि कोई भी हादसा होने पर उसकी पूरी जानकारी मिल सके. ये सभी कैमरे रॉकेट से दूर बने एक सुरक्षित बंकर (Bunker) से जुड़े हुए थे जहां वैज्ञानिक दूर बैठकर ही लॉन्च की पूरी स्थिति को एक स्क्रीन पर देख रहे थे.

ये भी पढ़ें-WhatsApp चलाने वालों को हो सकती है परेशानी! 1 मार्च से लागू होने जा रहा है सिम बाइंडिंग नियम, जानें क्या होंगे बदलाव

CCTV का नाम कैसे पड़ा?

चूंकि यह पूरा सिस्टम तारों (cables) की मदद से एक बंद नेटवर्क पर जुड़ा था, इसीलिए इसे ‘क्लोज्ड सर्किट टेलीविजन’ (CCTV) कहा गया. इस बेहतरीन आविष्कार की वजह से वैज्ञानिक अपनी जान जोखिम में डाले बिना दूर बैठकर ही रॉकेट लॉन्च की निगरानी और जांच करने में सफल रहे.

Exit mobile version