कानपुर. दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड का पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. हत्यारोपी विशाल गौतम के बयान और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से मिले सुराग के बाद पुलिस ने मृतक की बहू शालू मिनोचा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. पुलिस पूछताछ में शालू ने स्वीकार किया कि उसने विशाल के साथ मिलकर करीब 21 दिन पहले ही ससुर की हत्या की साजिश रची. हत्या के लिए विशाल ने 10 लाख रुपये मांगे थे, लेकिन शालू ने ससुर की मौत के बाद उसे नौकरी पर रखने का भरोसा दिया तो सौदा छह लाख रुपये में तय हो गया. दो लाख रुपये हत्या के बाद रविवार रात और चार लाख रुपये करीब 15 दिन बाद देने की बात हुई थी.
पांच सितंबर की तारीख तय की
पुलिस के मुताबिक, शालू ने पूछताछ में बताया कि पांच सितंबर को उसे पति सुभ्रत और बेटे के साथ पार्टी में जाना था. इसी वजह से हत्या के लिए पांच सितंबर की तारीख तय की गई. प्लान के मुताबिक विशाल अपने साथी राजकिशोर के साथ रात करीब नौ बजे प्लैनेट रतन ऑर्बिट के एंट्री गेट पर पहुंचा. उसने गेट पर अपना नाम शुभम बताया और हेलमेट पहन रखा था. इससे सिक्योरिटी कर्मी उसे पहचान नहीं सके. शालू ने विशाल को पहले ही फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी दे दी थी. दोनों के रात 9:15 बजे निकलने का प्लान था, लेकिन तैयारी में देरी होने के कारण समय करीब 9:40 हो गया. इसके बाद विशाल और राजकिशोर करीब आधे घंटे तक अपार्टमेंट परिसर में घूमते रहे. शालू और उसके पति के जाने के बाद दोनों फर्स्ट फ्लोर पर स्थित फ्लैट के बाहर पहुंचे और डुप्लीकेट चाबी से दरवाजा खोलकर अंदर गए.
गुमटी में बनी डुप्लीकेट चाबी
12 दिन पहले शालू ने हत्यारोपी विशाल गौतम को ओरिजनल चाबी से डुप्लीकेट बनवाने को दी थी. जिसके बाद विशाल ने गुमटी में एक दुकान से कंप्यूटर से चाबी बनवाई थी.
सीडीआर ने खोली कहानी
पुलिस को मुठभेड़ के दौरान एक वीडियो मिला, जिसमें विशाल गौतम हत्या कराने के पीछे शालू का नाम लेता दिखाई दिया. इसके बाद पुलिस ने विशाल के मोबाइल की जांच की. सीडीआर में सामने आया कि संडे दोपहर 12 बजे से रात नौ बजे तक विशाल और शालू के बीच 14 बार बातचीत हुई थी. ज्यादातर कॉल करीब एक से डेढ़ मिनट की थीं. इसके बाद विशाल के मोबाइल पर एक मैसेज भी मिला, जिसमें लिखा था- ‘हम लोग निकल रहे हैं.’ इस मैसेज के बाद पुलिस का शक और गहरा गया. पुलिस ने विशाल और शालू की पिछले एक महीने की सीडीआर खंगाली तो दोनों के बीच 309 बार बातचीत सामने आई. इनमें 158 इनकमिंग और 151 आउटगोइंग कॉल थीं.
1056 फ्लैट, 27 बंगले 650 कैमरों के बीच एंट्री
हाईप्रोफाइल रतन ऑरबिट की सुरक्षा व्यवस्था भी पुलिस की जांच के केंद्र में है. परिसर में 1056 फ्लैट और 27 बंगले हैं. यहां एक इंट्री और एक एग्जिट गेट है. एक शिफ्ट में चार सिक्योरिटी गार्ड और दो सुपरवाइजर तैनात रहते हैं. सुरक्षा कर्मियों के मुताबिक परिसर में हर किसी की एंट्री आसान नहीं है, लेकिन नौकरी से हटवाने की धमकी मिलने के कारण कई बार वे ज्यादा पूछताछ नहीं कर पाते. पूरे परिसर में इंट्री गेट समेत करीब 650 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. इसके अलावा कई फ्लैट मालिकों ने अपने घरों के बाहर और अंदर भी कैमरे लगा रखे हैं. वहीं, हत्या के बाद विनीत के फ्लैट के बाहर पांच पुलिसकर्मी तैनात किए गए है.
एक जुलाई को घर में लगवाए थे दो कैमरे
शालू ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह ससुर की बंदिशों से कई साल से परेशान थी. कुछ समय से विनीत उस पर शक भी करने लगे थे. सुभ्रत छोटे-मोटे काम के लिए विशाल को घर बुला लेते थे. इसी दौरान विशाल की शालू से बातचीत होने लगी. पुलिस के मुताबिक, विशाल को साल 2021 में विनीत ने चोरी का आरोप लगाकर नौकरी से निकाल दिया था. वह विशाल को पसंद नहीं करते थे. उसके घर आने पर विनीत शालू को भी काफी कुछ कहते थे. उसकी निगरानी के लिए घर में दो कैमरे लगवाए गए थे. एक कैमरा ड्राइंग रूम और दूसरा लॉबी समेत कमरों में आने-जाने वालों पर नजर रखता था. कैमरे लगने के बाद घर में विवाद बढ़ने की बात भी शालू ने बताई.
फर्म के 16 कर्मचारी भी रहते थे परेशान
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि विनीत मिनोचा की फर्म में करीब 16 कर्मचारी काम करते थे. उम्र बढ़ने के साथ उनकी बोलचाल में बदलाव आ गया था. पुलिस के अनुसार वह कर्मचारियों से गाली-गलौज करते थे और अक्सर लोगों पर शक करते थे. इस वजह से कर्मचारी उनसे दूरी बनाकर रखते थे.
हत्या की 5 बड़ी वजह आई सामने
- करोड़पति परिवार होने के बाद भी 1 पति को कर्मचारियों की तरह 35 हजार रुपए सैलरी मिलती थी.
- 2 शालू को शालू को खर्च के लिए सिर्फ 10 हजार महीना दिया जाता था.
- ससुर ने बहू की निगरानी के लिए 3 दो सीसीटीवी कैमरे लगाए थे.
- ससुर बाहर जाने और शालू के मनपसंद कपड़े पहनने पर रोक-टोक करते थे.
- 5 नौकर के घर आने जाने पर भी ससुर ससुर शालू को ही भला-बुरा कहते थे.
तकिये से मुंह दबाकर मारने का था प्लान
पुलिस के अनुसार, शालू और विशाल ने प्लान बनाया था कि विनीत मिनोचा के सो जाने के बाद तकिये से उनका मुंह दबाकर हत्या कर दी जाएगी. सुबह मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जाता और जल्द अंतिम संस्कार कर दिया जाता. इसी प्लानिंग के तहत विशाल और राजकिशोर फ्लैट के अंदर शालू कमरे में जाकर छिप गए. रात करीब 10:30 बजे विनीत मिनोचा फ्लैट का ताला खोलकर अंदर आए और अपने कमरे में चले गए. दोनों उनके सोने का इंतजार कर रहे थे. इसी बीच विनीत शालू के कमरे में पहुंच गए और लाइट जला दी. विशाल और राजकिशोर उन्हें लेकर बेडरूम की ओर गए. दोनों अपने साथ चाकू लेकर आए थे. दोनों ने विनीत पर ताबड़तोड़ वार किए और उनकी मौत के बाद निकल गए.
सीसीटीवी ने खोला राज, सुभ्रत ने विशाल को पहचाना
हत्या की सूचना के बाद पुलिस ने अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. फुटेज में सिर पर कपड़ा ढककर निकलता एक युवक दिखाई दिया. पुलिस ने फुटेज मृतक के बेटे सुभ्रत को दिखाई तो उसने युवक की पहचान विशाल गौतम के रूप में की. इसके बाद पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से विशाल और राजकिशोर की तलाश शुरू की. संडे देर शाम दोनों को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया. इलाज के बाद उनसे पूछताछ की गई और मंडे सुबह दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया.
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