Mukhtar Ansari: खुद किया आत्मसर्पण, बदले गए 6 जेल, पंजाब में काटी मौज, जानिए कैसे तीन मुकदमे बने माफिया मुख्तार अंसारी के लिए काल

Mukhtar Ansari: यूपी सरकार के मुताबिक मुख्तार हत्या, गैंगस्टर के आरोपों वाले 7 केस में सजायफ्ता था और उस पर अभी करीब 60 से ज्यादा मामलों में ट्रायल चल रहा था. वहीं मुख्तार एक केस में गवाह भी था.

Mukhtar Ansari

माफिया मुख्तार अंसारी

Mukhtar Ansari: उत्तर प्रदेश के माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार, 28 मार्च देर रात बांदा के मेडिकल अस्पताल में मौत हो गई. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक हार्ट अटैक की शिकायत पर उसे भर्ती कराया गया था. हालांकि, मुख्तार के परिवार के लोग उसकी मौत को साजिश बता रहे हैं. यूपी सरकार के मुताबिक मुख्तार हत्या, गैंगस्टर के आरोपों वाले 7 केस में सजायफ्ता था और उस पर अभी करीब 60 से ज्यादा मामलों में ट्रायल चल रहा था. वहीं मुख्तार एक केस में गवाह भी था.

हालांकि, इस बीच तीन केस मुख्तार के जीवन में निर्णायक मोड़ साबित हुए. पुलिस और परिवार की मानें तो जेल में मुख्तार की मौत की बड़ी वजह यह 3 केस ही बने है.

1. उसरी चट्टी केस

उसरी चट्टी, गाजीपुर के मोहम्मदाबाद विधानसभा में एक गांव है. 2001 में इस गांव में पंचायत चुनाव के दौरान मुख्तार अंसारी पर हमला हुआ. मुख्तार उस वक्त मऊ का विधायक था. इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई थी और मुख्तार समेत 7 लोग घायल हुए थे. इस हमले का आरोप बृजेश सिंह गैंग पर लगा. उसे मामले में आरोपी बनाया गया. वर्तमान में इस कांड का ट्रायल चल रहा है और इसमें जल्द ही मुख्तार की गवाही भी होनी थी. सितंबर, 2023 में सुनवाई के दौरान मुख्तार ने MP-MLA कोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी. उसने आरोप लगाया था कि उसरी चट्टी केस में सरकार गवाही नहीं होने देना चाहती है.

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2- 2005 मऊ दंगा

साल 2005 में मुख्तार अंसारी मऊ दंगे के मामले में आत्मसमर्पण कर दिया. इसी के बाद मुख्तार कभी जेल से बाहर नहीं निकला. साल 2005 में मऊ शहर में दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई थी. घटना का आरोप मुख्तार पर लगा था. रामलीला को लेकर दो पक्षों में भड़के दंगों में 15 लोग मारे गए और कई लोग घायल हो गए. यूपी में उस दौरान मुलायम सिंह की सरकार थी और कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष उनपर कई सवाल भी उठे. विपक्षी दलों के दबाव में बैकफुट पर आते ही सरकार ने मुख्तार के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया. बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. इसके बाद से पुलिस ने मुख्तार के खिलाफ कई पुराने केस खोल दिए. इस दौरान मुख्तार को अलग-अलग समय पर 6 जेलों में शिफ्ट किया गया.

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3- मजदूर हत्याकांड

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 में आजमगढ़ के तरंवा गांव में सड़क के ठेके पट्टे को लेकर गोलीबारी हुई. इस गोलीबारी में दो मजदूरों की मौत हो गई. मामले में पुलिस ने मुख्तार समेत 12 लोगों को आरोपी बनाया गया. वहीं साल 2019 से 2021 तक मुख्तार अंसारी पंजाब जेल में बंद था. इस दौरान तत्कालीन पंजाब की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा कि मुख्तार अंसारी वहां जेल में शानदार जिंदगी जी रहा था, लेकिन इसी बीच मजदूर हत्याकांड कांड के मामले में उसे वापस यूपी आना पड़ा. बता दें कि यूपी पुलिस मुख्तार को लेने 2021 में पंजाब पहुंची तो पंजाब पुलिस ने उसे देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यूपी पुलिस सुप्रीम कोर्ट चली गई. लंबी सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने मुख्तार को यूपी भेज दिया.

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