hormuz Strait: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. ईरान अमेरिका पर सीजफायर के उल्लंघन का आरोप लगा रहा है. यही वजह है कि ईरान की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. ईरान ने कहा कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है. दूसरी तरफ होर्मुज पार कर रहे जहाजों पर हुई फायरिंग के ईरानी कंट्रोल पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं.
ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण वापस अपनी पिछली स्थिति में आ गया है, जो अब सशस्त्र बलों के कड़े प्रबंधन और नियंत्रण में है. होर्मुज को पार कर रहे भारतीय जहाजों के साथ ही अन्य जहाजों पर ही IRGC के गार्डों ने गोलीबारी कर दी. इसी वजह से जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है.
भारत ने ईरान के इस व्यवहार की कड़ी निंदा की है. जिसके बाद भारत ने नई दिल्ली में ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. ईरान ने पहले ही भारत को भरोसा दिलाया था कि वह जहाजों को होर्मुज पार करने में मदद करेंगे. हालांकि ऐसा नहीं हुआ है.
ईरानी सरकार और IRGC के बीच सब ठीक?
होर्मुज में हुई जहाजों पर फायरिंग के बाद से ही कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान ने कहा था कि वह जहाजों को होर्मुज पार करने में मदद करेगा. लेकिन जब जहाजों ने होर्मुज को पार करने की कोशिश की तो IRGC के गार्डों की तरफ से फायरिंग कर दी गई. यही वजह है कि सवाल उठ रहे हैं कि ईरानी सरकार के आदेश को IRGC मान नहीं रहा है? या फिर दोनों के बीच टकराव है.
ईरानी सरकार ने क्या दिया जवाब?
होर्मुज में हुई गोलीबारी के बाद शनिवार देर रात गालिबाफ ने कहा कि अगर ईरान के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर पाए, तो किसी और देश के जहाजों को भी वहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा. ईरान ने अमेरिका की नाकाबंदी को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका अपनी नाकाबंदी बंद नहीं करेगा. तब तक होर्मुज नहीं खुलेगा.
भारत के विरोध पर क्या बोले ईरानी राजदूत
ईरान ने होर्मुज में 2 भारतीय जहाजों पर फायरिंग की है. इसके बाद 14 जहाज रोक दिया गया है. साथ ही 13 जहाज वापस लौट चुके हैं. ईरान के इस कदम की भारतीय राजदूत को तलब कर विरोध जताया है. भारत में ईरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि उन्हें होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाजों पर फायरिंग की जानकारी नहीं है.
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