Vistaar NEWS

CG News: रिश्वतखोरी साबित नहीं होने पर हाई कोर्ट ने पूर्व क्लर्क को किया बरी, भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में सुनाया फैसला

CG High Court (File Photo)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को रद्द कर दिया है. न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने वर्ष 2015 में दोषसिद्ध किए गए तत्कालीन सहायक ग्रेड-2 (क्लर्क) रामलाल शर्मा को सभी आरोपों से बरी कर दिया है.

यह अपील वर्ष 2015 में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), धमतरी द्वारा पारित उस निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत दोषी ठहराते हुए चार-चार वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी गई थी.

रिश्वतखोरी साबित नहीं होने पर हाई कोर्ट ने पूर्व क्लर्क को किया बरी

बता दें कि शिकायतकर्ता रमेश कुमार देवांगन, जो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से सेवानिवृत्त सहायक विस्तार अधिकारी थे, उनको छठवें वेतनमान के तहत एरियर राशि मिलनी थी. आरोप था कि इस भुगतान के लिए आरोपी रामलाल शर्मा ने 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की, जिसमें से 5 हजार रुपये तत्काल देने की बात कही गई. शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो, रायपुर द्वारा ट्रैप की कार्रवाई की गई. ट्रैप के दौरान 5,000 रुपये की कथित रिश्वत राशि होटल में पाई गई, जहां आरोपी चाय पी रहा था. एसीबी द्वारा हाथ धुलवाने पर घोल का रंग गुलाबी होने की बात कही गई और रिश्वत की राशि जब्त दिखायी गई.

हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में सुनाया फैसला

हाईकोर्ट ने मामले की गहन समीक्षा करते हुए कहा कि, रिश्वत की मांग का स्पष्ट और ठोस प्रमाण नहीं है. वॉयस रिकॉर्डिंग की ट्रांसक्रिप्शन में बातचीत अस्पष्ट है और उसमें रिश्वत मांग की पुष्टि नहीं होती. रिश्वत की राशि आरोपी के प्रत्यक्ष कब्जे से नहीं, बल्कि होटल संचालक के पास से मिली. होटल संचालक (मुख्य गवाह) ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया और उसे शत्रु गवाह घोषित किया गया. न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए दोहराया कि भ्रष्टाचार के मामलों में मांग और स्वीकार दोनों का प्रमाण अनिवार्य है, केवल फिनोल्फ्थेलीन टेस्ट या बरामदगी पर्याप्त नहीं है.

ये भी पढ़ें – CG News: कांग्रेस की मदद करते हैं बृजमोहन? चरणदास महंत बोले – उन्हें कांग्रेस में आने की जरूरत नहीं, उनसे अच्छे संबंध रहे
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार कर ली, ट्रायल कोर्ट का निर्णय निरस्त कर दिया और आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया. साथ ही, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 481 के तहत आरोपी को 25,000 रुपये का निजी मुचलका छह माह के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, ताकि यदि राज्य सरकार द्वारा विशेष अनुमति याचिका दायर की जाती है तो वह सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित हो सके.

Exit mobile version