CG News: छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों को कौशल प्रशिक्षण के साथ पढ़ाई से भी जोड़ा जा रहा है, इसी के तहत बस्तर संभाग के 6 पुनर्वासित नक्सलियों ने दसवीं की परीक्षा पास की है, इनमें बस्तर जिले के 3 आत्मसमर्पित नक्सली शामिल हैं.
दरअसल मुख्यधारा में जुड़े नक्सलियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अलग-अलग तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, इसके साथ ही जो लोग आगे पढ़ना चाहते हैं, उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है,. इसी पहल के तहत जगदलपुर में 3 पुनर्वासित नक्सलियों ने दसवीं की परीक्षा दी और अब वे अव्वल नंम्बर से पास हो गए हैं, उन्होंने ओपन स्कूल के जरिए दसवीं की परीक्षा दी थी.
सरेंडर नक्सली ने बताई अपनी कहानी
दसवीं की परीक्षा पास करने वाली सरेंडर नक्सली गीता नुरोटे ने बताया कि वह पहले नक्सली संगठन में डीवीसी के पद पर थी, वह संगठन में डॉक्टर के तौर पर काम करती थी, उन्होंने बताया कि उनका गांव जंगल क्षेत्र में है, वहां नक्सल संगठन के लोग आते-जाते थे और बैठकें करते थे. गीता ने बताया कि मैं संगठन में इंसास बंदूक रखती थी, मुझे पहले से पढ़ाई का शौक था. मैं पहले भी दसवीं की पढ़ाई कर रही थी. संगठन में रहते हुए भी पढ़ाई करती थी. आत्मसमर्पण करने के बाद भी मैंने पढ़ाई जारी रखी.
उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने अधिकारियों से दसवीं की परीक्षा देने की बात की, इसके बाद उन्हें परीक्षा देने का मौका मिला. परीक्षा की तैयारी में आत्मसमर्पण कर चुके चैतू दादा ने उनकी मदद की,उन्होंने संगठन में रहते हुए शिक्षक के रूप में पढ़ाया था,गीता ने कहा कि दसवीं के बाद मैं बारहवीं की पढ़ाई करना चाहती हूं. इसके बाद नर्सिंग की पढ़ाई करना चाहती हूं. आगे लोगों की सेवा करना मेरा लक्ष्य है.
आत्मसमर्पण के बाद उठाई किताबें
दूसरी कहानी संतोष की है, साल 2008 में संगठन में शामिल हुए संतोष ने 2025 में आत्मसमर्पण किया, घर की परिस्थितियों के कारण वह शुरुआती कक्षाओं के बाद पढ़ाई नहीं कर पाया था, लेकिन संगठन में रहते हुए उसे पढ़ने का मौका मिला. आत्मसमर्पण के बाद उसने फिर से किताबें उठाईं, 10वीं की परीक्षा दी और 308 अंक हासिल किए. अब वह 12वीं की पढ़ाई करना चाहता है और आगे खेती-बाड़ी या अपना कारोबार शुरू करने की सोच रहा है.
वहीं वीरू उर्फ रामधर की पढ़ाई का सफर भी कई पड़ावों से होकर गुजरा, साल 2009 में संगठन में शामिल होने वाले वीरू ने जेल में रहते हुए चौथी कक्षा की परीक्षा दी थी, मार्च 2024 में वापस लौटने के बाद अधिकारियों की पहल पर उसने ओपन स्कूल की 10वीं परीक्षा की तैयारी की, सुबह से लेकर रात तक पढ़ाई की और 256 अंक हासिल कर सेकंड डिविजन से पास हुआ,अब वह आगे पढ़ाई के साथ खेती-किसानी और अपना काम करने की इच्छा रखता है.
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