Bastar Dussehra: विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत चुकी है. 12 से भी अधिक अद्भुत रस्मों को भी इस दशहरा पर्व के दौरान धूमधाम से निभाया जा रहा है. नक्सलमुक्त होने के बाद बस्तर दशहरा पर्व को देखने के लिए बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से भी पर्यटक पहुंच रहे हैं. साथ ही बस्तर संभाग के सातों जिलों के ग्रामीण भी इन रस्मों में शामिल होने के लिए पहुंचे हुए हैं. ऐसे में भीड़ को नियंत्रण करने के साथ ही पूरे जिले में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम करना पुलिस के लिए चुनौती है.
400 पुलिस जवान तैनात
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हजारों की संख्या में भीड़ के चलते किसी भी तरह की रिस्क नहीं ली जा रही है, इसलिए पूरे 24 घंटे पुलिस बल की ड्यूटी लगाई जा रही है. लगभग 400 जवानों को तैनात किया जा रहा है. इसके अलावा शहर में लगे सीसीटीवी कैमरे की मदद से कंट्रोल रूम से पूरी निगरानी रखी जा रही है.
एसपी का क्या कहना है?
एसपी ने बताया कि पुलिस असामाजिक तत्वों के साथ-साथ सभी तरह की गतिविधियों पर नजर बनाए रखी हुई है. बस्तर दशहरा के सभी रस्मों में पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है. साथ ही कई जगहों पर पुलिस सहायता केंद्र भी बनाए गए है, ताकि इस दशहरा पर्व में शामिल होने आए पर्यटक और स्थानीय लोगों को किसी तरह की दिक्कतों का सामना ना करना पड़े.
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नक्सलमुक्त होने के बाद पहला दशहरा
बस्तर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राज्य के नक्सलवाद से मुक्त होने के बाद पहला दशहरा है. लोगों धूमधाम से मनाने के लिए पहुंच रहे हैं. ये देश का सबसे लंबे समय यानी 75 दिनों तक चलने वाला दशहरा है. इसकी शुरुआत 14वीं-15वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजाओं ने की थी. इस त्योहार का मुख्य आकर्षण रथ होता है.
