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CG News: कागजों में मलेरिया मुक्त बस्तर! कांकेर में 10 दिन में अब तक 3 स्कूली बच्चों की मौत, संभाग में 8426 लोग पॉजिटिव

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कांकेर में अब तक 3 स्कूली बच्चों की मौत

CG News: बस्तर को मलेरिया मुक्त बनाने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही है. मलेरिया मुक्त बस्तर के दावो की बस्तर में हवा निकल गई है. उत्तर बस्तर कांकेर जिले में 10 दिन में 3 छात्रों की मौत मलेरिया से हो गई. वही 9 बच्चे मलेरिया पॉजिटिव पाए गए. जिनमें 2 की हालत गंभीर होने के कारण रायपुर रेफर करना पड़ा है.

बस्तर में मलेरिया का कहर

​जनवरी 2026 से अब तक बस्तर संभाग में 8426 मलेरिया मरीज मिले हैं. इनमें 7021 पी. फाल्सीपेरम, 1168 पी. विवैक्स और 254 मिक्स मलेरिया के मामले शामिल हैं.

स्वास्थ्य विभाग के दावों की खुली पोल

स्वास्थ्य विभाग बता रहा है कि संभाग में 6.63 लाख से अधिक ब्लड स्लाइड जांच की गई. सवाल यह है कि यदि रोकथाम के उपाय प्रभावी होते तो इतने बड़े पैमाने पर संक्रमण क्यों फैलता. ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आज भी कई जगह जलभराव है. मच्छरों की संख्या बढ़ रही है. समय पर दवा का छिड़काव नहीं हो रहा. जागरूकता की कमी भी बनी हुई है. यही कारण है कि हर बारिश में मलेरिया फिर से सिर उठाने लगता है.

मलेरिया के बढ़ते मामलों से उठे कई सवाल

बहरहाल, केवल जांच और दवा से मलेरिया पर नियंत्रण संभव नहीं है. समय पर मच्छरदानी वितरण, जलभराव की रोकथाम, नियमित निगरानी और सामुदायिक भागीदारी जरूरी है. जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार, दर्भा और बकावंड जैसे कुछ ब्लॉकों में मामलों में कमी आई है और केंद्र सरकार से नई मेडिकेटेड मच्छरदानियां भेजी जा रही हैं, लेकिन जब तक वे गांवों तक नहीं पहुंचतीं, तब तक खतरा बना रहेगा. बस्तर में मलेरिया के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिर्फ अभियान चलाना काफी है, या फिर गांवों तक समय पर संसाधन पहुंचाना ही असली चुनौती है.

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